शहर की मंडियों में धान की खरीद ना होने व जो थोड़ी बहुत हो रही है, उसके लिए औने-पौने दाम मिलने पर आढ़तियों व किसानों ने बुधवार को रोष प्रकट किया। बुधवार को मंडी के आढ़ती और किसान इकट्ठे होकर जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के कार्यालय में शिकायत देने पहुंचे। जब वहां पर अधिकारी नहीं मिले तो गुस्साए आढ़ती और किसानों ने प्रदर्शन किया और डीसी कैंपस कार्यालय पहुंच गए। वहां राइस मिल एसोसिएशन के सदस्यों से भी किसानों और आढ़तियों की मंडियों में खरीद को लेकर तीखी बहस हुई। काफी इंतजार के बाद भी जब वहां डीसी नहीं मिली तो वे लघु सचिवालय में गए और डीसी को उनकी परेशानियों से अवगत करवाया। डीसी ने उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन श्याम बहादुर खुरानिया, जयकिशन मान, रामफल मलिक, उदय सिंह, नरेश कुमार, रामकुमार, जयभगवान व किसानों ने बताया कि सरकार की ओर से धान की पीआर किस्म के रेट 1835 रुपये प्रति क्विंटल तक निर्धारित किए गए हैं। एक तो मिलर मंडियों में धान की खरीद नहीं कर रहे और जिन राइस मिलों द्वारा धान खरीदी जा रही है वे भी बिना नमी जांचे 1600 से 1700 रुपये तक खरीद रहे हैं। इस ओर संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। न तो किसानों को उनकी मेहनत के मुताबिक रेट मिल रहा और न ही आढ़तियों को किसी प्रकार का लाभ मिल रहा है। कुछ किसान कम रेट में फसल बेचने के लिए तैयार नहीं हैं, जिस कारण उनके साथ पुराने समय से जुड़े किसानों के साथ भी लेनदेन प्रभावित हो रहा है और वे फसल बेचने के लिए बाहर की दूसरी मंडियों में जा रहे हैं।
मंडियों में नहीं पहुंच रहे खरीद के लिए मिल
श्याम बहादुर खुरानिया व जयकिशन मान ने कहा कि सरकार की नई नीतियों के तहत मंडियों के लिए जो मिल अलॉट किए गए थे वे भी मंडियों में फसल की खरीद के लिए नहीं पहुंच रहे। आढ़तियों की मांग को देखते हुए चीका के राइस मिलरों को कैथल मंडी में फसल की खरीद के लिए कहा गया था, लेकिन वे भी मंडियों में फसल नहीं खरीद रहे। इससे किसानों और आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राइस मिलरों का मंडी में कम आना भी रेट कम होने का एक कारण है। उन्होंने मांग की कि मिलों को खरीद के लिए मंडियों में भेजा जाए।
अलॉट किए गए मिल नहीं करेंगे खरीद तो उनपर होगी कार्रवाई
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने किसानों और आढ़तियों के सामने ही डीएफएससी को निर्देश दिए कि वे धान की बिक्री के दौरान अपना कर्मचारी वहां तैनात करें। इसके साथ ही डीआरओ को मंडियों में जाकर जांच करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जिले की सभी मंडियों में फसल की खरीद सही ढंग करवाने का जिम्मेदारी सबसे पहले उनकी है। साथ ही उन्होंने आढ़तियों को आश्वासन दिया कि जो मिलर मंडियां अलॉट होने के बावजूद फसल की खरीद के लिए नहीं पहुंच रहे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मिलों का कोटा पहले की तरह किया जाए तो नहीं होगी किसी को परेशानी
राइस मिल एसोसिएशन के राज्य प्रधान अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि सरकार ने अपनी नई नीति के तहत राइस मिलरों के धान खरीदने के कोटे को कम कर दिया है। जिन मिलों ने पिछले बार 90-90 हजार क्विंटल तक धान खरीदी थी, इस बार वे 42 हजार क्विंटल से ज्यादा खरीद नहीं कर सकते। धान के रेटों में कमी आना और मिलों का मंडियों में नहीं पहुंचने का यह बड़ा कारण है। सरकार को चाहिए कि मिलों का कोटा पहले की तरह रखा जाए। इससे किसानों और आढ़तियों को फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं होगी। अगर नीति यही रही तो आने वाले समय में यह किसानों के लिए नुकसानदेह रहेगी।
इस बार मिलर्स कम आ रहे हैं। पिछली बार 35 में से सात मिल नियमों के कारण कम हो गए। 28 में से 8 मिलों का कोटा खत्म हो चुका है। शेष मिलों द्वारा खरीद की जा रही है। प्रयास किया जा रहा है कि जिन मिलों का कोटा पूरा हो गया है, उनका कोटा बढ़ाया जा सके।
वरिंद्र सिंह डीएफएसी, कैथल