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पेप्सू को मुख्यमंत्री देने वाले कलायत हल्का की हो रही है अनदेखी

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देश के आजाद होने के साथ बना कलायत विधानसभा क्षेत्र 64 वर्ष बीत जाने के बाद भी अपना वजूद नहीं बना पाया। इसे सत्तासीन राजनैतिक दलों की खुदगर्जी कहें या विधानसभा क्षेत्र का दुर्भाग्य। देश के आजाद होने के साथ ही पूर्वी पंजाब की आठ रियासतों को मिलाकर नए राज्य पेप्सू तथा पूर्वी पंजाब राज्य संघ-पटियाला का निर्माण किया गया। पटियाला को इसकी राजधानी बनाया गया। आजाद भारत के पहले चुनाव से अस्तित्व में आ गया था कलायत विधानसभा क्षेत्र।
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आजाद भारत के पैप्सू राज्य के पहले चुनाव में 13 जनवरी 1949 को ज्ञान सिंह रेरेवाला कांग्रेस के पहले मुख्यमंत्री बने। उनके साथ ही उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले बाबू बृषभान थे, जिन्होंने कलायत विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए चुनाव जीता था। बाबू बृषभान की कलायत में ससुराल थी। वे पंजाब राज्य के मूनक गांव से ताल्लुक रखते थे। हिसार के एक स्कूल से मैट्रिक की शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने एफसी 1930 में कॉलेज, लाहौर और 1932 में ला कॉलेज लाहौर में अपनी डिग्री ली। देश में चल रहे अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में बाबू बृषभान वर्ष 1939 में उठ खड़े हुए। आजादी की लड़ाई में संघर्ष करते हुए बाबू बृषभान किसानों के हित से भी जुड़े रहे। पेप्सू राज्य में बड़े जमीदारों को निर्धारित जमीन देते हुए उन्होंने छोटे काश्तकार को दो जून की रोटी के लिए मुफ्त में भूमि प्रदान की। इनके सियासी करियर की शुरूआत 23 मई 1951 को पेप्सू राज्य के उप मुख्य मंत्री के तौर पर हुई। कामयाबी का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि वे 12 जनवरी 1955 में पेप्सू के मुख्यमंत्री पद पर पहुंच गए। कुल एक वर्ष 294 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। पर कलायत हलका को भूल गए। कलायत हलका के विकास के लिए राजनेताओं के भूलने का सफर 1955 से शुरू हुआ जो वर्ष 2014 तक जारी रहा।
दोबारा नही बना सीट से कोई विधायक
राजनैतिक महत्व के कारण हमेशा से कलायत विधानसभा राजनैतिक दलों के लिए हाट सीट रही है। विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने आजाद, कांग्रेस, इनेलो, जन संघ, हविपा के साथ-साथ समय-समय पर अस्तित्व में आए दलों को अपनी कसौटी पर परखा है। इस दौर में अब तक यह खासियत रही कि जो एक बार विधायक बना उसे दोबारा यहां से विधायक बनने का अवसर नहीं मिला। लोगों को समय-समय पर सत्ता में रहे राजनीतिक दलों से बड़ी उम्मीद रही हैं पर कलायत को विलायत नही बना पाए राजनेता।
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