कलायत। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर एसडीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में कृषि, उद्यान, पंचायत, राजस्व और पशुपालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में दिशा-निर्देश दिए गए कि गांव स्तर पर जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम बनाकर डयूटी लगाई गई है वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन योजना के बारे में पूर्ण जानकारी दें। इसके लिए हर गांव में नुक्कड़ सभा व जागरूकता शिविरों का आयोजन करके कृषि यंत्रों जैसे बेलर मशीन, सुप्र सीडर, मल्चर मशीन और चॉपर के बारे में जानकारी दें। अधिकारी किसानों को बताएं की इनका उपयोग करके फसल अवशेष का कैसे उचित प्रबंधन करना है। ताकि हमारी मिट्टी व वातावरण शुद्ध व स्वस्थ रह सकें। किसान कम खर्च में मलचिंग तकनीक माध्यम से अपने फसल अवशेषों का प्रबंधन भी कर सकते है और साथ में गेहूं की बिजाई भी समय पर कर पायेंगे।
एसडीएम ने बताया की इस योजना के तहत जो किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग करके फसल अवशेषों का प्रबंधन करेंगे उन्हें कृषि विभाग की और से प्रति एकड़ 1200 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाऐगी। खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय मान ने बताया कि कृषि विभाग कलायत कि तरफ से गांव कैलरम, बालू, बाता, भालंग व चौशाला में फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के आर्थिक हित, खेतों की उर्वरता और पर्यावरण के लिए लाभकारी है। सभी विभाग मिलकर फसल अवशेष प्रबंधन की इस योजना के सफल क्रियान्वयन और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाएंगे। अगर कोई किसान इसके बावजूद भी फसल अवशेषों में आग लगाता हुआ मिला तो ऐसे किसानों पर सख्त कानूनी कारवाही करते हुए 5000 से लेकर 30000 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है और साथ में एफआइआर भी दर्ज होगी।