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लवलेश दत्त ने 21 वर्ष की उम्र में न्यूयॉर्क की लूनर रजिस्ट्री हासिल की

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सपने वो नहीं होते जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वह होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। यह वाक्य सिद्ध कर दिखाया है गांव मूंदड़ी के लवलेश दत्त ने। लवलेश दत्त ने बताया कि उनका चंद्रमा पर जमीन लेने का सपना था, जो पूरा हो गया है। एक एकड़ जमीन उसको मिली है और अब उनका लक्ष्य अंतरिक्ष पर काम करने का है। लवलेश दत्त को 21 वर्ष की उम्र में ही न्यूयॉर्क की लूनर रजिस्ट्री प्रमाणित चंद्रमा की नागरिकता प्राप्त हुई है। लवलेश दत्त चंद्रमा पर एक संपत्ति का कानूनी मालिक बन गया है। यह संपत्ति लैकस सोमनिरियम या लेक ऑफ ड्रीम्स के रूप में जाना जाता है। भूमि चंद्रमा के पूर्व की ओर स्थित है और लूना, पृथ्वी के चंद्रमा पर नामित है। इस प्रकार, न्यूयॉर्क शहर में द लूनर रजिस्ट्री द्वारा चंद्रमा पर स्थाई नागरिकता के लिए लवलेश को मंजूरी दी गई है। लवलेश दत्त ने पहले से ही अपने स्टार्टअप, नवाचारों और सामाजिक कल्याण के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। वह यूएनओ से कर्मवीर चक्र, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड का खिताब भी अपने नाम किया है। लवलेश भारत के पहले नागरिक हैं, जिन्होंने अब तक सबसे कम उम्र में चंद्रमा पर नागरिकता प्राप्त हुई है।
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लवलेश दत्त ने बताया कि उसे एक दिन नींद नहीं आ रही थी। वह रात को ही उठकर अपने पापा से बोला पापा उसे चांद पर जमीन चाहिए है। उसके पापा ने उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया और सोने के लिए कहा। लेकिन वह सोया नहीं और रिसर्च करने लगा। रिसर्च में उनको रसिया की अंतमरक्ष कंपनी के बारे में पता चला। वह कुछ समय बाद रसिया की अंतरिक्ष कंपनी में गया। जहां पर चंद्रमा की जमीन के बारे में काफी जानकारी मिली। इसके बाद गत वर्ष ही अमेरिका में जाकर चांद पर जमीन लेने के लिए आवेदन किया था और 16 अप्रैल को उसके जन्मदिन के अवसर पर उनको यह तोहफा मिला है। उन्होंने बताया कि उनके पास अमेरिका से कोरियर के माध्यम से सर्टिफिकेट, रजिस्ट्री, जमीन का नक्शा उनके पास पहुंच गया है। इसके साथ ही उनको स्माइल फोर मिलियन और यूनाइटेड नेशन की तरफ से जूनियर वैज्ञानिक का पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
वाणिज्य पृष्ठभूमि में अपनी शिक्षा के बावजूद, लवलेश का प्रौद्योगिकी के प्रति एक मजबूत झुकाव है, जिसका उन्होंने बहुत ही उत्पादक तरीके से उपयोग किया है। वह डीडीयू यूनिवर्स के संस्थापक और सीईओ हैं। जो एक टेक शिक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप है। लवलेश ने कहा कि कोई भी धर्म, परिवार, क्षेत्र, जाति, लिंग या रंग आपके पास नहीं है। वह चीज जो सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह है कल्पना शक्ति और आपका आत्म-विश्वास। उन्होंने कहा मेरे माता-पिता मेरी हिम्मत हैं, जिन्होंने हमेशा हर कदम पर मेरा साथ दिया और वे हमेशा मुझे ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो मैं करने के बारे में सोचता हूं।
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