कैथल। नागरिक अस्पताल में 3.41 करोड़ की लागत की लिथोट्रिप्सी मशीन (बिना चीर-फाड़ पथरी तोड़ने) अब खुद सिस्टम के लिए पथरी बन चुकी है। प्रबंधन की लापरवाही और इंजीनियरों के साथ चल रहे अंतहीन पत्राचार के खेल ने इस मशीन को लगभग कबाड़ में तब्दील किया जा रहा है। गरीब मरीज सरकारी अस्पताल की दहलीज से लौटकर निजी केंद्रों पर 20 से 25 हजार रुपये इस तकनीक पर लुटाने को मजबूर हैं।
प्रबंधन का दावा है कि मशीन की मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी और इंजीनियरों को बार-बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल पत्राचार से मशीन ठीक हो जाएगी? लंबे समय से चल रहे इस कागजी खेल में समाधान की कोई गंभीरता नजर नहीं आती। इंजीनियर अस्पताल नहीं पहुंच रहे और प्रबंधन हमने तो पत्र भेज दिया है कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। हालांकि एक-दो बार इंजीनियर आए तो समाधान फिर भी नहीं हुआ। अब करोड़ों रुपये की मशीन खराब होने और मरीजों को सुविधा न मिलने का जिम्मेदार कौन है, ये भी जांच का विषय है। बता दें कि मशीन के खराब होने से पहले चार-पांच मरीज सुविधा का रोजाना लाभ ले रहे थे।
चूहों ने अपना घर बना लिया
हैरानी की बात यह है कि जिस मशीन को मरीजों का दर्द दूर करना था, उसे चूहों ने अपना घर बना लिया है। लंबे समय तक देखरेख के अभाव में चूहों ने मशीन के कीमती तार और संवेदनशील कलपुर्जे कुतर दिए थे। वर्षों से बंद पड़ी इस मशीन की सुध लेने वाला कोई नहीं है। तकनीकी रूप से सक्रिय रहने वाली इस मशीन का जंग खाना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि इस मशीन की मरम्मत होती है तो इस मशीन से बिना ऑपरेशन के लेजर तकनीक से पथरी का मुफ्त इलाज हो सकेगा। इससे मरीज को लंबे समय तक आराम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इलाज पर भी कोई खर्च नहीं आएगा। लिथोट्रिप्सी में किडनी की पथरी को तोड़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है।
मरीजों को पथरी के साथ हजारों का दर्द
पथरी का दर्द सहने वाला मरीज जब सरकारी अस्पताल आता है, तो उसे उम्मीद होती है कि बिना चीर-फाड़ के लिथोट्रिप्सी के जरिए उसका इलाज मुफ्त हो जाएगा, लेकिन मशीन खराब होने का हवाला देकर उन्हें निजी सेंटरों का रास्ता दिखा दिया जाता है। निजी अस्पतालों में एक सेशन के नाम पर 20 से 25 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। दिहाड़ी मजदूर और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह रकम किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। मरीज पथरी और साथ में जेब पर पड़ने वाले बोझ के दर्द से दोहरी मार झेल रहा है।
इंजीनियर को पत्र लिखा है : पीएमओ
नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डाॅ. दिनेश कंसल ने बताया कि लिथोट्रिप्सी मशीन की मरम्मत के लिए संबंधित इंजीनियर को पत्र लिखा गया है, उसके जल्द आने की संभावना है। मशीन को जल्द ठीक करवा कर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़