13 ढांड 01 श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन देते आचार्य सतबीर शर्मा।
ढांड। गांव जाजनपुर में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण के बीच श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में आचार्य सतबीर शर्मा (नौच वाले) श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण का रसपान करा रहे हैं। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं।
कथा के दौरान आचार्य सतबीर शर्मा ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीव को परमात्मा से जोड़ने वाला एक दिव्य सेतु है। इसके श्रवण से मन की शुद्धि होती है, अज्ञान और भय का नाश होता है और व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत को भक्ति का आधार माना गया है। यह केवल ज्ञान प्रदान करने वाला ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन में भक्ति, सदाचार और ईश्वर प्रेम को जागृत करने की प्रेरणा देता है।
कथा के नियमित श्रवण से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के संचित पाप नष्ट होते हैं और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। आचार्य ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण को वेदों और उपनिषदों का सार कहा गया है। यह कल्पवृक्ष के समान है, जो श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा सुनने वाले भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने का माध्यम बनता है। भागवत कथा मनुष्य को संसार से पलायन नहीं बल्कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए धर्म, सत्य और अच्छे कर्मों के साथ ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने सप्ताह पारायण की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि शास्त्रों के अनुसार राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण अधिकांश स्थानों पर भागवत कथा का आयोजन सात दिनों तक किया जाता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों का आनंद लिया। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का माहौल बना हुआ है।
13 ढांड 01 श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन देते आचार्य सतबीर शर्मा।