कैथल। संगीत अध्यापक एवं ज्योतिषाचार्य श्याम सुंदर शर्मा ने वैसाखी पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। शर्मा ने बताया कि सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह ने इस दिन अमृत पान स्वयं भी चखा था और पंज प्यारों को भी चखाया था। इस दिन खालसा पंथ की नींव रखी गई थी। इस दिन किसान अपनी पक्की फसल काटना शुरू करते हैं। इसके लिए वैसाखी का दिन शुभ माना जाता है।
इस दिन नदियों एवं तालाबों पर स्नान किया जाता है, लोग नए वस्त्र पहनते हैं व बाजार से मिठाई लेकर आते हैं। उन्होंने बताया कि वीर, वीरांगना व देश भक्तों के बलिदान, लगन व यातनाओं के सहने से ही भारत ने आजादी पाई थी। 19 अप्रैल 1919 को जलियां वाला बाग अमृतसर में लोग जश्न मना रहे थे। अंग्रेज सैनिकों ने जनरल डायर के आदेश से निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई थीं। इसमें हजारों लोग मारे गए थे और कुआं शवों से भर गया था। उनकी याद में भी वैसाखी का पर्व मनाया जाता है। उन्होंने वैसाखी पर्व की सभी को बधाई दी।