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साल का अंतिम चंद्रग्रहण : मंदिरों के कपाट रहे बंद, छिड़का गंगा जल

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ग्रहण पर हनुमान वाटिका मंदिर के कपाट बंद करते पुजारी विशाल शर्मा। संवाद - फोटो : Kaithal
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कैथल। मंगलवार को कार्तिक मास का दूसरा व इस वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण लगा। चंद्रग्रहण का सूतककाल शुरू होने के साथ ही साधकों ने भजन कीर्तन किया। चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों में कपाट बंद किए गए और पूजा मंदिरों के कपाट भी बंद रहे और पूजा-अर्चना भी नहीं की गई। मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे ही सूतक काल शुरू हो गया। इसके साथ ही साधकों ने भजन-पूजन बंदकर दिया।
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शाम के समय ग्रहण की अवधि में शाम 5:30 बजे से 6:20 बजे तक लोगों ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। ग्रहण समाप्त होने पर गंगा में स्नान किया। पूजा-घर व मंदिरों में गंगाजल छिडक़ा गया। हनुमान वाटिका मंदिर के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि सूतक काल के कारण मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण के समय मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद रखे जाते हैं। इस दौरान केवल मंत्र का जाप ही किया जाता है। इस समय में गर्भवती महिलाओं को भी खास ध्यान रखना पड़ता है। इस समय न तो भोजन खाते हैं और न की कोई चीर और फाड़ वाली क्रियाएं की जाती हैं।
विश्वकर्मा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन
गुहला-चीका। विश्वकर्मा मंदिर में चल रही सप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। इस मौके पर मुख्य यजमान के रूप मे विश्वकर्मा मंदिर चीका की महिला मंडल की सदस्यों ने अपने परिजनों के साथ पूर्णाहुतियां दीं। श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और प्रसाद ग्रहण किया। कथा आचार्य पंडित विद्यासागर व कथावाचक देवी प्रसाद ऋषिकेश वाले ने भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा की महिमा बताई। पंडित विद्यासागर ने लोगों से भक्ति मार्ग से जुडऩे और सत्कर्म करने को कहा। उन्होंने कहा कि हवन से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है।
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व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। पंडित विद्यासागर ने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। कथा के समापन के बाद छोले पूरी व चावल का भंडारा लगाया। इस अवसर पर चरणों देवी, रमादेवी, किरण देवी, ऊषा बंसल, सुदेश मित्तल, विमला कक्कड़, रजनी, गीता, आशा गर्ग, धनपति जांगड़ा, मीना जांगड़ा, निर्मला पांचाल, प्रेमलता, चंद्रपति, विश्वकर्मा मंदिर के प्रधान ऋषि धीमान, नंदलाल, रमेश गोयल, ईश्वर, सुशील कुमार व प्रिंस मौजूद रहे।
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