गांव के सरपंच की नशे के खिलाफ अनूठी मुहिम
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मुख्यमंत्री के गोद लिये गांव क्योड़क नशा मुक्ति की ओर अग्रसर है। गांव के सरपंच बलकार आर्य के नेतृत्व में पंचायत ने गांव में नशे के खिलाफ एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की है। जिसमें गांव के युवा गांव में नशा करने वालों को इसके दुष्परिणामों के बारे में बताकर उन्हें नशे को त्यागने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अब स्थिति यह है कि गांव से शराब का ठेका बाहर हो चुका है। वहीं पंचायत 1 मई से जागरूकता अभियान भी चलाएगी।
तीन साल पहले नशाखोरी चरम पर
गांव के सरपंच बलकार आर्य ने बताया कि सरपंच के चुनावों से पहले गांव के नशाखोरी अपने चरम पर थी। उस समय गांव के कई स्कूलों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नशे के पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे थे। जिससे गांव का भविष्य काफी खराब हो रहा था। इस दौरान नशे के कारण वाहन दुर्घटनाओं व घरों में नशे के कारण हो रही कलह से आत्महत्या करने से कई शादीशुदा व्यक्ति भी अपनी जान भी गवां चुके थे। इस पर गांव में आर्य युवा सभा द्वारा नशे को दूर करने का प्रण लिया गया, जो वर्तमान में कामयाबी के कगार पर है।
नशा हटाओ, युवा बचाओं के नारे पर हुआ चुनाव
सरपंच ने बताया कि गांव में चुनाव के दौरान प्रमुख मुद्दा नशे को दूर करना था। शराब हटाओ, युवा बचाओ के नारे पर चुनाव हुए। सभी युवाओं ने नशे को दूर करने का संकल्प लेते हुए चुनाव में वोट डाले।
1500 युवा अभियान