एक ही विभाग में एक ही तरह की सेवाओं के लिए अलग-अलग भुगतान से लोगों सहित विभागीय कर्मचार भी परेशान हैं। मामला हरियाणा रोडवेज और प्राइवेट बसों में किराये व अन्य सुविधाओं से जुड़ा है। लोगों से जुटाई गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि निजी बस संचालक कई रूटों पर निर्धारित किराये से कम और कई रूटों पर निर्धारित किराये से ज्यादा राशि वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं सरकार द्वारा दी गई 39 निशुल्क यात्रा श्रेणियों में से कई श्रेणियों के पात्र लोगों को प्राइवेट बसों में लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों में इस बात को लेकर रोष है। वहीं एक ही विभाग में अलग-अलग तरह के फैसलों से भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
50 की बजाय दी 55 रुपये की टिकट
टोहाना रूट के गांव बलियाणा से कैथल बस स्टैंड पर पहुंचे कुष्ण कुमार ने बताया कि उसके गांव में केवल लोकल रूट पर चलने वाली सरकारी बसें ही रुकती है। रोडवेज की बस में 50 रुपये किराया लगता है। लेकिन निजी बस के कंडक्टर ने उसे 55 रुपये की टिकट दी।
किराये में कर रहे मनमानी
गांव सीवन निवासी रोहन ने बताया कि उसके गांव से रोडवेज की बस में 13 रुपये टिकट लगती है। लेकिन निजी बस के कंडक्टर ने उसे 10 रुपये की टिकट दी। चीका रूट पर निजी बस के कंडक्टर अपनी मनमर्जी से किराया वसूल रहे हैं। किसी यात्री से चीका से कैथल का किराया तो पूरा लिया जाता है और किसी से 20 से 25 रुपये लिए जाते हैं।
सरकारी सुविधाओं का नहीं मिलता लाभ
नरवाना से कैथल पहुंचे यात्री कृष्ण मोर ने कहा कि सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराये में छूट दी गई है। लेकिन निजी बसों में बुजुर्ग यात्रियों का पास नहीं चलता। जो सरकार के नियमों को उल्लंघन है।
पास होने के बावजूद लेते हैं किराया
बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी अमित व अभिमन्यु ने बताया कि वे गांव नरवल से कैथल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। सरकार ने बस पास को निजी बसों में मान्यता दी है। लेकिन उसके बावजूद भी उनसे किराया लिया जाता है। गांव देवबन से आने वाले बारहवीं के विद्यार्थी अभिमन्यू ने कहा कि यदि विद्यार्थी के पास सरकारी पास है और निजी बस में चेकिंग होती है तो चेकर पास अपने साथ ले जाते हैं जिसे वापस नहीं दिया जाता। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
किराये में कम ज्यादा की बात नहीं है। कई बार लोगों के पास पूरे पैसे नहीं होते तो उनसे कम किराया भी ले लिया जाता है। वहीं कई बार छुट्टे पैसे ना होने के कारण कुछेक रुपये ज्यादा लिए जाते हैं। ऐसा केवल दैनिक यात्रियों के साथ व्यवहार होता है। अगले दिन उसे कम राशि में टिकट दी जाती है। रोडवेज विभाग के सभी नियमों का पालन होता है। सरकार द्वारा जिन 39 श्रेणियों में छूट दी जा रही है, उसमें विद्यार्थी नहीं आते।
महेंद्र ढांडा, सचिव, निजी बस वेलफेयर समिति
किराये निर्धारण का कार्य आरटीए की जिम्मेदारी है। वही इसमें कुछ बता सकते हैं।
रामकुमार, जीएम रोडवेज