कैथल। गांव हाबड़ी की 18 वर्षीय हॉकी खिलाड़ी कुदरत ने अपनी मेहनत और लगन से नई पहचान बनाई है। महाराष्ट्र के पुणे में 12 से 23 अगस्त तक आयोजित 16वीं जूनियर नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में कुदरत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। सीमित संसाधनों के बावजूद कुदरत ने करीब पांच-छह साल के अभ्यास में हॉकी के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
कुदरत राजकीय कन्या उच्च विद्यालय हाबड़ी में चल रही खेल नर्सरी में अभ्यास करती हैं। उन्होंने छोटी उम्र से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। लगातार अभ्यास और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है कि वह सब-जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुकी हैं। इसके अलावा स्कूल नेशनल में कांस्य पदक और अब जूनियर नेशनल में भी कांस्य पदक जीतकर उन्होंने प्रतिभा का परिचय दिया है। वह स्कूल स्तर की सब-जूनियर प्रतियोगिता में दो बार भाग ले चुकी हैं। कुदरत का सपना भारतीय हॉकी टीम में चयनित होकर देश का प्रतिनिधित्व करना है। उन्होंने कहा कि वह कड़ी मेहनत कर अपने माता-पिता और कोच का नाम रोशन करना चाहती हैं। उनके प्रशिक्षण में कोच गुरबाज सिंह, सुरेंद्र प्रताप हाबड़ी, बृजभूषण हाबड़ी, शेर सिंह व लवप्रीत सिंह का मार्गदर्शन मिल रहा है।
कुदरत के पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने बेटी के खेल के जुनून को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। कुदरत बताती हैं कि गांव में जब स्थानीय हॉकी खिलाड़ी स्कूल में आते और अपने अनुभव साझा करते थे तो उनसे काफी प्रेरणा मिलती थी। इसी प्रोत्साहन ने उन्हें हॉकी को कॅरिअर बनाने के लिए प्रेरित किया।
हाबड़ी को कहा जाता है हॉकी खिलाड़ियों की खान
कुदरत का कहना है कि गांव हाबड़ी से बड़ी संख्या में खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं। वर्तमान में चीन में चल रही जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में भी गांव के सुखविंद्र और हरपाल भारतीय टीम का हिस्सा बनकर खेल रहे हैं। गांव के खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच हैं। गांव के खिलाड़ियों की उपलब्धियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
हॉकी खिलाड़ी कुदरत। कोच