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ाहब हमारा क्या कुसुर, रोडवेज व समिति की बसें भी चल पड़ी

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किलोमीटर स्कीम के तहत लगी करीब पांच माह से जिले में 15 बसें बस स्टैंड पर खड़ी धूल चाट रही हैं। जिससे संचालकों को रोजाना लाखों रुपये की चपल लग रही है। वहीं सरकार द्वारा रोडवेज बसों को धड़ल्ले से चलाने के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही प्राईवेट बसों में 25 प्रतिशत बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके बाद किलोमीटर स्कीम की बसों के संचालकों में भी बसों के संचालन की आस जगी। लेकिन विभाग द्वारा अभी तक इन बसों के संचालन की कोई बात नहीं की रही है। संचालकों ने जल्द बसें चलाने की मांग की।
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करीब साढे़ चार लाख रुपये रोजाना हो रहा खर्च
संचालकों से मिली जानकारी के अनुसार प्रति बस लगभग तीस हजार रुपये के हिसाब से पंद्रह बसों पर करीब साढे़ चार लाख रुपये रोजाना का खर्च बताया जा रहा है। संचालकों ने बताया कि बसों के संचालन न होने के बावजूद भी स्टाफ व बीमा कंपनियों को पैसों का भुगतान किया जा रहा है।
लॉकडाउन से पहले एक-दो माह ही चल पाई बसें
सरकार और ऑप्रेटरों के बीच लंबे समय से चली आ रही जद्दोजहद के बाद बसों का संचालन किया गया। जो कि लगभग एक-दो माह ही चल पाई। इसके बाद कोविड-19 के कारण देश में लॉकडाउन शुरू हुआ तो एक बार फिर किलोमीटर स्कीम की बसों पर आर्थिक संकट मंडरा गया। इनके संचालन पर फिर रोक लग गई।
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विभाग को ई-मेल और मंत्री से भी मिल चुके हैं संचालक
नटराज बस सर्विस सहयोगी अनिल ढुल ने बताया कि विभाग से लिखित में भी संचालन की मांग की गई। रोडवेज और निजी बसें चलाई जा रही हैं तो हमारा क्या कुसूर है। इन्हें भी चलाया जाए। उदाहरण के लिए जैसे कैथल से जींद के लिए रोडवेज की बसें चल रही है। वैसे किलोमीटर की बसें भी चलाई जाए। उसमें भी किलोमीटर पूरे हो जाते हैं।
रोडवेज विभाग के टीम कमलजीत ने बताया कि हेड ऑफिस से अभी तक किलोमीटर स्कीम बसों के संचालन को लेकर किसी प्रकार के निर्देश नहीं आए हैं। जैसे ही आदेश आएंगेे तत्काल लागू कर संचालन किया जाएगा।
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