संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व होता है। इसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान सभी शुभ और मांगलिक कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि कार्य करने पर रोक लग जाती है। साल में दो बार खरमास आते हैं।
इस संबंध में पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि गई तो उन्होंने बताया कि हिंदू पंचाग अनुसार इस बार खर मास 15 दिसंबर की रात से शुरू होगा और 15 जनवरी को समाप्त होगा।
शांडिल्य ने बताया कि शास्त्र के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास एक माह के लिए लग जाते हैं। सूर्य आज से सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे और एक महीने तक धनु राशि में रह कर 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उसी दिन मकर संक्रांति पर्व के साथ शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि धनु बृहस्पति की राशि है। धार्मिक ग्रंथों की मान्यता है कि सूर्य देव जब भी बृहस्पति की राशि पर भ्रमण करते हैं तो मनुष्य के लिए यह अच्छा नहीं होता। सूर्य के बृहस्पति राशि में आने से गुरु ग्रह का बल कमजोर होता है और सूर्य भी अपना तेज कम कर लेते हैं। इस दौरान सूर्य की चाल बहुत धीमी हो जाती है। मांगलिक कार्य के लिए इन दोनों ग्रहों का मजबूत होना जरूरी है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इसी वजह से खरमास के दौरान शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य करने पर अशुभ फल मिलते हैं। उन्होंने खरमास में रोजाना सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इस महीने में नित्य प्रति सूर्य भगवान की पूजा करना और आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करना बहुत फलदाई माना जाता है।
खरमास में व्यक्ति को अपने इष्टदेव की पूजा-सेवा करने एवं दान-पुण्य करने से पुण्यों में वृद्धि होती है।