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खडालवा के अकेले वोटर ने भी नहीं किया मतदान

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कलायत। उपमंडल के राजस्व रिकार्ड में शामिल गांव खडालवा के एकमात्र वोटर ने भी रविवार को मतदान में हिस्सा नहीं लिया। खडालवा के भगवान खटवांगेश्वर मंदिर के श्री महंत रघुनाथ गिरी ही खडालवा गांव के एक मात्र मतदाता हैं।
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उन्होंने कहा कि वे सरपंच व पंच के चुनाव में भी अपना मतदान नहीं करेंगे। राजस्व रिकार्ड में इस गांव की उपस्थिति एक बेचिराग गांव के रूप में दर्ज है। इस गांव में वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल है, गांव के नाम से डाकघर है, पटवारी है, जमीन है व भगवान महाकांत का एक पौराणिक मंदिर है। इस मंदिर में रहने वाले संत ही मतदाता हैं। महंत गिरिजा गिरी व घनश्याम गिरी का देहावसान हो जाने से दो वोट समाप्त हो गए। इस समय गांव खडालवा की और से पंचायत समिति चुनावों के लिए केवल एक वोट लालगिरी महाराज का ही मौजूद है। साधु समाज ने इस चुनाव में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही महंत ने प्रदेश सरकार से खड़ालवा को अपने से पंचायत का अलग से दर्जा देने की मांग की। आजादी के बाद से ही इस गांव को पड़ोसी गांव मटौर की पंचायत के साथ जोड़ा गया है। बताते हैं कि किसी समय में खडालवा एक आबाद गांव का था। बाहरी आक्रमणकारियों ने इस गांव को तबाह कर दिया था। इसके बाद दोबारा यह गांव आबाद नहीं हुआ। ऐसी मान्यता है कि यहां किसी समय में कोई विकसित संस्कृति रही होगी, जिसे शकों व हूणों के हमलों ने तबाह कर दिया।
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समय के साथ साथ सभ्यताएं लुप्त होती गई, पर इस पौराणिक शिवलिंग का वजूद नहीं मिटा। पुराणों के अनुसार इस मंदिर का संबंध भगवान राम के पूर्वज राजा खट्वांग से है। भगवान राम से 10 पीढ़ी पूर्व हुए उनके अंग्रेज राजा खट्वांग ने राजकाज त्याग कर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। महाकांत ने इस स्थान पर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद यहां भगवान शिव का शिवलिंग उत्पन्न हुआ।
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