राजौंद। मनुष्य जीवन सफल बनाने के लिए शास्त्रों में व्रत की बड़ी महिमा की गई है। व्रत और उपवास के नियम पालन के लिए शरीर को तपाना ही तप है। भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति में व्रतों का विशेष महत्व है।
आचार्य जीवन जी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 18 जून को निर्जला एकादशी है। उन्होंने बताया कि सभी व्रतों में श्रेष्ठ एकादशी का व्रत माना गया है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी व्रत से दूसरे व्रतों की अपेक्षा सौ गुणा फल मिलता है।
उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशी के समान फल मिलता है। आचार्य ने बताया कि 18 जून को आने वाले निर्जला एकादशी के दिन मिट्टी के बर्तन में जल भरकर इसके साथ पंखा, खरबूजा, चीनी, फल, वस्त्र व दक्षिणा सहित संकल्प करके भगवान विष्णु के मंदिर या श्रेष्ठ ब्राह्मण को देना चाहिए। इस दिन प्यासों को मीठा व शीतल जल पिलाने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। संवाद