संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मुक्तसर जिले के रामेआना गांव के कारसेवक हर माह की तरह इस बार भी सेवा भाव से पिहोवा के ऐतिहासिक पाली साहिब गुरुद्वारा की ओर निकले थे लेकिन अबकी सात कारसेवकों में
से पांच को मौत ने बीच रास्ते अपने पास बुला लिया।
पता चला है कि करीब 250 किलोमीटर की यात्रा कर वे संगत की सेवा करने जाते थे। इस बार उनकी ड्यूटी गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से 20 दिन पहले ही तय कर दी गई थी। महंत की बरसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वे रविवार को गांव से रवाना हुए और कैथल शहर के डोगरा गेट स्थित नीम साहिब गुरुद्वारा में रात को विश्राम किया।
परिजनों के अनुसार, मूल योजना के अनुसार वे रविवार रात को ही पिहोवा पहुंचना चाहते थे, लेकिन बाद में विचार बदलकर सोमवार सुबह रवाना होने का निर्णय लिया। उन्हें यह अंदाजा न था कि यही फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा।
हादसे में गांव रामेआना निवासी 62 वर्षीय नरिंद्र सिंह, 57 वर्षीय हकीकत सिंह, 67 वर्षीय काकू सिंह और 60 वर्षीय मक्खन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, 58 वर्षीय तारा सिंह ने चंडीगढ़ पीजीआई ले जाते समय दम तोड़ दिया। सभी मृतक किसान थे और अपने गांव में खेतीबाड़ी करते थे। फरीदकोट जिले के रामेआना गांव के ही निवासी 70 वर्षीय कुलवंत सिंह और 55 वर्षीय मंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज जारी है। इस हादसे ने परिजनों और ग्रामीणों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
क्योड़क गांव के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां तेज रफ्तार गाड़ियों का आवागमन हमेशा बना रहता है। पहले भी यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इस स्थान पर तुरंत स्पीड ब्रेकर और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस संबंध में डीएसपी सुशील प्रकाश ने बताया कि उन्हें सुबह सूचना मिली थी कि क्योड़क के पास संगत से भरी गाड़ी को एक रोडवेज बस ने टक्कर मार दी है। गाड़ी में सात लोग सवार थे, जिनमें से पांच की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और उन्होंने स्वयं भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है