संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। माता गेट पर सूर्यकुंड डेरे में स्थित काली माता के मंदिर में चैत्र नवरात्र के उपलक्ष्य में लगे दो दिवसीय मेले का मंगलवार की दोपहर बाद समापन हो गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने काली माता के मंदिर में माथा टेककर मनोकामनाएं मांगी।
चीका रोड से माता गेट व माता गेट से हिंद सिनेमा तक दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर कमेटी के अनुसार इस दो दिवसीय मेले में करीब तीन लाख के करीब श्रद्धालु काली माता पर माथा टेकने पहुंचे। मेले में सोमवार सुबह से श्रद्धालु यहां पहुंचने शुरू हो गए थे ओर रातभर माता के दर्शनों के लिए भीड़ लगी रही। इसके बाद मंगलवार सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए लंबी लाइन लगी। विशाल मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने झूलों का भी आनंद उठाया और भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया।
मेले में पहुंचे श्रद्धालु मेहर सिंह, पूर्ण सिंह, पवन, होशियार सिंह, कुलवंत सिंह, जोधा सिंह व अन्यों ने काली माता रानी के मान्यता के बारे में बताया। अपने परिवार के साथ मेले में पंजाब से आए श्रद्धालु माही राम ने बताया कि वह यहां 12 वर्ष की आयु से ही काली माता रानी के मेले में आ रहे हैं। आजादी से पहले उनके बुजुर्ग पाकिस्तान से पैदल आकर चैत्र के पहले नवरात्र पर यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे।
पूर्व विधायक दिल्लू राम व कुलवंत बाजीगर ने काली माता के मंदिर का विशाल निर्माण करवाया। माही राम ने बताया कि यहां पर कलुआ पीर बाबा का एक धूना हैं। बाजीगर समाज के लोग धूने पर उपले डालकर मनोकामना मांगते हैं। श्रद्धालु यहां पर अपनी श्रद्धा अनुसार मुर्गे व बकरों की भेंट चढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि यह बाजीगर समाज की कुलदेवी माता हैं। यहां पर परिवार के लोग बच्चों की शादी के लिए मन्नतें मांगते हैं और शादी होने पर नवविवाहित जोड़े यहां आकर पूजा करते हैं। कहा कि मेले में मंदिर के महंत रमनपुरी महाराज की ओर से बेहतर ढंग से व्यवस्था बनाने का कार्य किया है। इसके लिए वे उनका भी आभार जताते हैं।