संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंगलवार को कैथल में कड़ाके की ठंड का असर हर जगह दिखा। ठंड के मारे लोग कांपते नजर आए और बाइक सवार गर्म कंबल में लिपटे दिखाई दिए। जिले में बीते छह दिनों से न्यूनतम तापमान 4 या 5 डिग्री सेल्सियस पर चल रहा है।
दिन में हल्की धूप ने थोड़ी राहत दी, लेकिन शीतलहर के सामने सूर्य की गर्मी भी ज्यादा असर नहीं कर पाई। जिले में अधिकतम तापमान लुढ़क कर 13 डिग्री पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान 5 डिग्री दर्ज किया गया।
आगामी दिनों में भी ठंड से निजात मिलने की संभावना कम है। जिले में शीतलहर का असर लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य पर इसका असर दिख रहा है। खांसी-जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। जिला प्रशासन ने भी अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है, लेकिन शीतलहर से राहत के आसार कम बताए गए हैं। ठंडी हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रहेगी, इसलिए लोगों को सतर्क रहते हुए दिनचर्या तय करने की सलाह दी गई है। मंगलवार की सुबह सूर्य देवता ने आसमान पर लोगों को दर्शन दिए तो लोगों को कुछ हद तक ठंड से राहत मिली लेकिन शाम तक फिर ठंड बढ़ गई।
गेहूं की फसल के लिए ठंड फायदेमंद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लगातार ठंड बढ़ने और सुबह के समय पाला जमने का असर फसलों पर दिखाई देने लगा है। कृषि मौसम विशेषज्ञ डा. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि वर्तमान में पड़ रहा पाला गेहूं की फसल के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। पाले के कारण गेहूं की अत्यधिक बढ़वार रुकती है और फुटाव नियंत्रित रहता है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। उन्होंने बताया कि इस समय गेहूं की फसल में दूसरा और तीसरा पानी चल रहा है, ऐसे में पाले का असर सकारात्मक माना जा रहा है।
डा. वर्मा ने बताया कि जहां गेहूं को पाले से लाभ मिल रहा है, वहीं सरसों, आलू, मटर और मूली जैसी फसलों के लिए पाला नुकसानदायक हो सकता है। इन फसलों में पाले के कारण पत्तियां झुलसने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। सब्जियों की छोटी पौध पाले से जल्दी प्रभावित होती हैं, जिससे नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जिन किसानों ने सब्जियों की पौध तैयार की है, वे पौध को फूस, कपड़े या प्लास्टिक शीट से ढक कर रखें। इसके अलावा
फसलों के पास धुआं करके तापमान में हल्की वृद्धि कर पाले से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। मौसम को देखते हुए किसानों को सतर्क रहकर समय पर आवश्यक उपाय अपनाने की आवश्यकता है।