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हर साल सरकारी स्कूलों से घट रहे हैं 10 हजार विद्यार्थी

Sat, 06 May 2017 12:13 AM IST
kaithal beauro
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c - फोटो : kaithal beuaro
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जिले के सरकारी स्कूलों में प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार विद्यार्थी स्कूल स्कूल छोड़ रहे है। जो सरकार व शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पांच साल पहले जिले के सरकारी स्कूल में करीब एक लाख 42 हजार विद्यार्थी थे। जो इस साल महज 95 हजार के आस-पास बच गए हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की स्थिति को लेकर अभिभावकों में बढ़ रहे विश्वास के कारण आगे भी यह संख्या घट सकती है।
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पांच साल पहल थे करीब 1 लाख 42 हजार
सरकारी स्कूलों में पांच साल पहले विद्यार्थियों की संख्या 1 लाख 42 हजार से अधिक थी। वर्ष 2014-15 में यह संख्या एक लाख 27 हजार 493 पर आकर थम गई। वहीं वर्ष 2015-16 में एक लाख 13 हजार 676 पर आकर थमी। वहीं वर्ष 2016-17 में एक लाख 8 हजार 782 रह गई। वहीं वर्ष 2017 में अभी तक केवल 95 हजार विद्यार्थियों ने जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। कक्षा ग्यारहवीं का दाखिला होना अभी शेष है।

16 स्कूलों का हो चुका है समावेश
जिले में पांच साल पहले करीब 615 स्कूल थे। विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण करीब 16 प्राइमरी स्कूलों को बड़े स्कूलों में समावेश कर दिया है। वर्तमान में जिले के 599 स्कूल है। जिसमें 95 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है।
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खराब परीक्षा परिणाम व अध्यापकों से छोड़ा विद्यार्थियों ने स्कूल
जिले के स्कूलों में अध्यापकों की कमी व खराब परीक्षा परिणाम विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने का मुख्य कारण रहा है। वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2015 के बीच में शहर स्कूलों में कमेस्ट्री, फिजिक्स व गणित के अध्यापक नहीं थे। जिसके कारण करीब राजकीय कन्या स्कूल व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 1500 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़कर निजी स्कूलों में मजबूरी में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 से लेकर 15 तक सरकारी स्कूलों को परिणाम बहुत खराब रहा। जिसके कारण अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोह भंग हो गया।

सरकारी स्कूलों में रहती है महीने में 15 दिन छुट्टियां
 अभिभावक ओमप्रकाश, सतबीर सिंह, मनोज, अनुज कुमार, पुनीत कुमार तितरम ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कम ओर छुट्टियां अधिक रहती है। कई बार तो विद्यार्थी महीने में केवल 15 दिन ही स्कूल जाता है। 15 दिन की छुट़्िटयां रहती है। ऐसे में शिक्षा कैसे मिल सकती है। इसके अलावा स्कूलों में साफ-सफाई का अभाव है। विद्यार्थी नीचे बैठे रहते है।

स्कूलों में अध्यापकों संख्या पूरी
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान सतबीर गोयत ने बताया कि जिले भर से अध्यापकों ने घर-घर जाकर अध्यापकों के बारे में सूचित किया है। स्कूलों के फिजिक्स, कैमिस्ट्री, गणित सहित अन्य प्राध्यापक पूरे हो चुके हैं। इस बार विद्यार्थियों की संख्या के साथ-साथ परीक्षा परिणामों में भी सुधार होगा।
जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल तनेजा ने बताया कि स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या चिंता का विषय है। सरकार इस ओर कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। गांव-शहरों में घर-घर जाकर अध्यापक विद्यार्थियों को स्कूल लाने का प्रयास कर रहे है।
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