कैथल। आरकेएसडी कॉलेज बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता का चयन इंटरनेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है। यह छात्रा मंगोलिया में पांच से आठ जून तक होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी। इसके लिए वह मंगोलिया के लिए रवाना हो चुकी है। छात्रा के चयन से कॉलेज सहित परिजनों में खुशी का माहौल है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसबी गोयल व शारीरिक शिक्षा विभाग कोच सुरेंद्र कुमार ने बताया कि कॉलेज की छात्रा का इंटरनेशनल प्रतियोगिता का हिस्सा बनना कॉलेज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता ने 10 बार इंटरनेशनल स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में विभिन्न देशों में शानदार प्रदर्शन कर कॉलेज का नाम रोशन कर चुकी है।
हंगरी में जूनियर चैंपियनशिप में जीता था गोल्ड
कोच ने बताया कि ललिता ने वर्ष 2012 में हंगरी में गोल्ड वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद वर्ष 2013 में कजाकिस्तान में इंटरनेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया है। जिसके लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में ओलंपियन सुशील कुमार ने सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि ललिता ने विश्वविद्यालय व इंटर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में भी वर्चस्व कायम किया है।
ललिता के पिता किसान और बड़ी बहन है डॉक्टर
ललिता के पिता किसान हैं। उसकी बड़ी बहन गुड़गांव में डॉक्टर है। जबकि छोटा भाई सत्यजीत अभी मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वह ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता है। कॉलेज प्रबंधक समिति के प्रधान सतीश बंसल व महासचिव साकेत मंगल ने कहा कि यह आरकेएसडी कॉलेज के लिए बड़े गौरव का विषय है कि कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में खिलाड़ियों को हर संभव सहायता दी जाती है।
मैं नहीं खेल पाया, अब बेटी करेगी सपना पूरा : पिता
ललिता की उपलब्धि पर उसके पिता जोगिंद्र सिंह व माता उषा रानी ने कहा कि उनकी बेटी ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम रोशन किया है। वहीं ललिता के पिता हिसार के गांव खरड़ अलीपुर निवासी जोगेंद्र ने कहा कि आज बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। मैं स्वयं एक कुश्ती खिलाड़ी था। लेकिन स्कूल में कुश्ती में हाथ टूट जाने के बाद आगे नहीं खेल पाया। मेरी बेटी मेरा सपना पूरा कर रही है।
उसकी बचपन से ही खेल में रुचि है। पहले उसने हॉकी खेली, लेकिन हॉकी में टीम में उससे बड़े खिलाड़ी होने के कारण उसका चयन नहीं हो पाता था, वह रोने लग जाती थी। जिस कारण बाद में पीटीआई की परख के बाद उसने रेसलिंग शुरू की। जिसमें आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झंडे गाड़ रही है। मुझे विश्वास है कि ललिता इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन करेगी।
‘गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन करूंगी’
इस सफलता पर कोच फूले नहीं समा रहे हैं। कोच सुरेंद्र ने कहा कि ललिता होनहार खिलाड़ी है। हमें उस पर गर्व है।
इस उपलब्धि पर ‘अमर उजाला’ से फोन पर ललिता ने कहा कि यह मेरे लिए खुशी की बात है। मेरे माता-पिता और कोच सर ने हमेशा प्रोत्साहित किया। मुझे विश्वास है कि मैं गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन करूंगी।