जाते-जाते वर्ष 2016 स्वास्थ्य की दृष्टि से जिले में कुछ खास नहीं देकर गया। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने सीएम बनने के बाद कैथल में पहले ही कार्यक्रम में सीटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, जिसे सेहत महकमा आज तक मुहैया नहीं करा सका है। जिला अस्पताल में दूसरी मंजिल पर चल रहे सीएमओ कार्यालय के पुराने अस्पताल में शिफ्ट होने का मामला भी अधर में लटका है तो अल्ट्रासाउंड की मशीन बिना रेडियोलॉजिस्ट के बंद पड़ी है। वर्ष 2017 में उम्मीद है कि इन परियोजनाओं पर कुछ काम हो।
डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की बजाय घट गई
जिला अस्पताल में 52 डॉक्टरों की जरूरत है। डॉक्टरों की संख्या पिछले सालों की मुकाबले वर्ष 2016 में 20 से भी नीचे चली गई। यहां 17 डॉक्टर हैं। जबकि कई दिनों में तो एक हजार से भी ज्यादा की ओपीडी पहुंच जाती है।
200 बेड का अस्पताल बनाने का मामला अटका
जिला अस्पताल को 100 बेड से बढ़ाकर 200 बेड का किए जाने का मामला भी अटका हुआ है। इसके लिए मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन आवश्यक स्टॉफ ना मिलने के कारण कई तरह की सुविधाओं से जिले के लोगों को महरूम होना पड़ रहा है।
भटक रही हैं गर्भवती महिलाएं
करीब एक साल से यहां अल्ट्रासाउंड मशीन खराब पड़ी हुई है। रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है।
अस्पताल में प्रतिदिन आती हैं 1400 से 1600 ओपीडी-सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन 1400 से 1600 ओपीडी है। डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता है। ओपीडी अधिक ओर डाक्टरों की कमी के कारण काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
वर्ष 2017 से उम्मीदें
नए साल में जिला अस्पताल में 200 बेड की सुविधा शुरू होने, एमआरआई एवं सीटी स्कैन की सुविधा होने, स्टाफ बढ़ाए जाने एवं अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू होने की उम्मीद है।
डॉक्टरों की कमी तो है। पुराने अस्पताल में सीएमओ कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए रिपेयर का काम जारी है। जैसे ही काम पूरा हो जाएगा, कार्यालय शिफ्ट कर लिया जाएगा। एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा अभी यहां नहीं है।
डा. नीलम कक्कड़, डिप्टी सिविल सर्जन, कैथल।