बेसहारा गायों द्वारा खेतों में किए जाने वाले उजाड़ से दुखी चीका व आसपास के किसानों ने वीरवार को चीका कैथल रोड पर नहर के पास जमा लगा दिया और सरकार व गौशाला प्रबंधक कमेटी के खिलाफ प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन की अगुवाई नरेंद्र सीड़ा व दलबीर नैन कर रहे थे। जाम लगा रहे किसान नरेंद्र सीड़ा, दलबीर नैन, पूर्व एमसी मेहर सिंह, नछतर सिंह, विक्रम, राजपाल, मलकीत, सुखदेव का कहना था कि शहर में गोशाला होने के बावजूद हजारों गाय बेसहारा घूम रह हैं। अंधेरा होते ही आसपास के खेतों में घुस आती हैं और वहां पर खड़ी गेहूं व सब्जियों की फसल को पूरी तरह से चट कर जाती है। किसानों का कहना है कि वे पूरी रात इन गायों के पीछे दौड़ते हुए बिताते हैं। गोशाला कमेटी के प्रति अपना रोष प्रकट करते किसानों का कहना था कि गोशाला के कर्मचारी रात के समय गायों को बाहर निकाल देते हैं जोकि किसानों के खेतों को उजाड़ती हैं। जाम लगाए जाने का समाचार मिलते ही चीका थाना प्रभारी रणबीर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाबुझा कर साथ लगती गोशाला के अंदर ले गए, जिसके बाद सडक़ पर से जाम खुल सका।
गो रक्षा दल के प्रधान कृष्ण भार्गव का कहना है कि गो माता की दुर्गति के लिए हम सब जिम्मेवार है। सरकार ने हर गांव में गो चरान के लिए सैंकड़ों एकड़ भूमि छोड़ हुई है। छोड़ी गई अधिकतर भूमि पर किसान काबिज है, जो भूमि बची हुई है उसे पंचायतें मुनाफे के लिए ठेका पर देती हैं। भार्गव ने कहा यदि सरकार गांवों में मौजूद गौ चरान की भूमि को खाली करवाए और उस पर पंचायतों के सहयोग से गोशालाएं स्थापित करवा दे तो इस समस्या का हल स्वयं ही निकल आएगा।
गोशाला चीका के प्रधान रमेश सिंगला का कहना है कि गोशाला के अंदर से गायों को छोड़ने के आरोप निराधार है। मात्र दो एकड़ में 2300 गायों को रखा गया है। गौशाला के अंदर ओर अधिक गाय रखने की गुंजाइश नहीं हैं।