अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति जिला कैथल की बैठक आर्य समाज मंदिर कैथल में चौ. सूबे सिंह पूर्व सरपंच बालू की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जाट समाज ने 29 जनवरी 2017 से शुरू होने वाले जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर धरने के लिए स्थान निश्चित करने सहित कई बातों पर विचार किया गया। सर्वसम्मति से तितरम मोड़ व देवबन कैंची चौक दोनों में से एक जगह धरना देने का फैसला लिया गया। जिसके लिए प्रशासन से अनुमति ली जाएगी।
जिला प्रधान प्रवीण किछाना ने बताया की जाट समाज पर फरवरी 2016 को आंदोलन को लेकर दर्ज सभी झूठे मुकद्दमे, आंदोलन के दौरान सरकार की गोलियों से शहीद हुए सभी युवाओं के परिवारों को एक-एक नौकरी देने की झूठी घोषणा और उसके बाद 5 जून से 19 जून तक के आंदोलन के लेकर हुए समझौते को सरकार के अभी तक लागू नहीं करने के चलते समाज में रोष है। समाज के साथ हुए समझौते में मंत्रियों सहित अधिकारियों के साथ छह बातों पर सहमति बनी थी। जिसके लिए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. यशपाल मलिक व हरियाणा प्रदेश के सभी जिलों के पदाधिकारी ने 31 अगस्त 2016 तक का समय दिया था, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार ने जाट समेत छह बिरादरी के साथ धोखा किया। जिला संयोजक बलवान कोटड़ा ने शांतिप्रिय आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। समाज के निर्णय के बाद बताया की जिला कैथल में आंदोलन के लिए स्थान तितरम मोड़ और देवबन कैंची तय की गयी है।
बैठक में भरत सिंह बैनीवाल, संजय जागलान रोहेड़ा, इंद्र पाई, मियां सिंह जाजनपुर, सुभाष मौन मटौर, जोगी राम जाखोली, अमरनाथ नरड़, दलीप जुलानी खेडा, दलीपा बालू, सूबे सिंह बालू, रामफल फौजी गुलियाना, रणधीर किछाना, सुरजीत चहल हरिपुरा, कुलदीप गढ़ी, सोनू सोंगल, रामफल मालावाला, प्रेम संगतपुरा, राजा संगतपुरा, मा. अजमेर हरसोला, सुंदर लाल सेरधा, राजा कसान, सुरेंदर पूर्व सरपंच चंदाना, रामफल पूर्व सरपंच तारागढ़, महेंद्र अटेला, धर्म सिंह बाबा लदाना, रोड समाज मंच के प्रधान छज्जु राम जाम्बा, कैप्टन बलजीत भाना, प्रेम जखोली, प्रेम रोहे, रामकरण चहल, बानी सिंह सिंधु, मा. रामकला बालू, रामनिवास सिसला,जय प्रकाश सेरधा, बिल्लू चंदाना जाट नेता उपस्थित थे।
अखिल भारतीय जाट महासभा नहीं करेगी आरक्षण आंदोलन में सहयोग
अखिल भारतीय जाट महासभा 29 जनवरी को होने वाले जाट आरक्षण आंदोलन का समर्थन नहीं करेगी। महासभा के जिला प्रधान सुभाष बडसीकरी ने कहा कि जो लोग जाट आरक्षण आंदोलन के नाम पर अपनी दुकानदारी को चमकाने में लगे हैं उनके लिए प्रदेशहित व आपसी भाईचारा कोई मायने नहीं रखता।
बड़सीकरी ने कहा कि अभी पिछले वर्ष फरवरी में आपसी सौहार्द व भाईचारे के सीने पर लगे जख्म भरे भी नहीं हैं। जो आपसी विश्वास उठ गहरी खाई बन गई थी उसे एक साल से पाटा जा रहा है। जो लोग बार-बार आरक्षण के मामले को उठा कर समाज में विघटन करने में लगे हैं, उनकी असलियत तो यह है कि न तो वे हरियाणा प्रदेश के वासी हैं तथा न ही प्रदेश की साझी विरासत व संस्कृति से वाकिफ हैं। जाट आरक्षण आंदोलन का मामला उच्च न्यायालय के विचारणीय है तो न्यायालय के फैसले तक तो इंतजार किया जाना चाहिए। इस मामले पर उच्च न्यायालय व सरकार बेहद संजीदा है तथा उन्हें विश्वास है कि प्रदेश में जाटों को आरक्षण मिल कर रहेगा। उन्होंने कहा कि जो जाटों के नेता होने का दम भरते हैं, उन्होंने तो एक बार भी जेल गए युवकों से मिलना भी गवारा नहीं समझा। अखिल भारतीय जाट महासभा ऐसे तथा कथित नेताओं व उनके द्वारा किए जाने वाले आंदोलन का पूरी तरह से बहिष्कार करती है। इस अवसर पर उनके साथ मल्लू बालू, पवन चहल, राकेश, बलकार ग्योंग भी मौजूद थे।
उधर, कलायत पुलिस स्टेशन में भी खंड के सभी गांवों के लोगों की एक साझा बैठक बुलाई गई। पुलिस विभाग की ओर से ओमप्रकाश मलिक ने सभा में मौजूद लोगों से कहा कि वे हर हाल में आपसी भाईचारा बना कर रखें। असामाजिक लोगों को नकार दें तथा कोई भी ऐसा कार्य न करें जो समाज में विघटन पैदा करे। सभा में मौजूद लोगों ने इस बात पर सहमति जताई की आपसी भाईचारे व सौहार्दपूर्ण वातावरण को किसी भी सूरत में खराब नहीं होने दिया जाएगा।