जाट आरक्षण संघर्ष समिति के चंदे को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को समिति की जांच टीम ने पूर्व कोषाध्यक्ष सहित पूर्व पदाधिकारियों को क्लीन चिट दे दिया। कहा कि दोनों पक्षों में से यदि कोई पक्ष फैसले को स्वीकार नहीं करेगा तो उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। वहीं आरोप लगाने वाले गुट ने आठ मई तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई ना करने पर 14 मई को महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है।
देवबन कैंची चौक पर दिए गए धरने के चंदे को लेकर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहताश हुड्डा व प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक कैथल पहुंचे। उन्होंने एक निजी होटल में आंदोलन के दौरान खर्चे को लेकर प्रेसवार्ता भी की। हुड्डा ने बताया कि आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नामित जांच कमेटी की एक बैठक छोटू राम धर्मशाला रोहतक में हुई थी। जिसमें जिले की कार्यकारिणी के दोनों पक्षों के तीन तीन सदस्यों को शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि जांच के शुरू होने से पहले दोनों पक्षों की सहमति ली गई व दोनों पक्षों ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि उन्हें जांच कमेटी का निर्णय को स्वीकार करना होगा।
सभी मुद्दों की जांच में ये निष्कर्ष पाए गए
1. धरने पर चेक द्वारा प्राप्त चंदे की राशि 28 मार्च के बाद शामिल की है। जो वर्तमान में कैश बुक में दर्ज है।
2. किचन के सामान के खरीद बिल संख्या 44 की राशि 15 हजार 530 रुपये की डबल एंट्री पाई जो कि दोनों पक्षों ने स्वीकार कर ली है। इस राशि को डेबिट कर दिया गया है।
3. प्रचार गाड़ियों के खर्चें का विवरण अलग अलग दिखाकर सामूहिक रूप से 45 हजार रुपये बताया गया है। इसमें अनियमितता की बात सामने नहीं आई है।
4. पिछले धरने की बकाया राशि 2 लाख 61 हजार रुपये थी, जो लेखा-जोखा में 85 हजार रुपये बताई गई है। जांच में सामने आया है कि यह राशि कार्यकारिणी द्वारा अन्य खर्चों में प्रयोग में लाई गई है। जिसके बिल उपलब्ध हैं।
5. चाय पानी, घी, चीनी की खरीद के असली बिल से संबधित दुकान पर जाकर जांच कमेटी द्वारा जांच की गई व कोई विशेष अनियमितता सामने आई।
6. सिलेंडर की खरीद एवं गायक कलाकारों को भुगतान की भी जांच की गई, रिकार्ड के अनुसार कोई अनियमितता सामने नहीं आई है।
7. रसीद संख्या 1 से 12 तक जो कुल चंदा छह हजार रुपये प्राप्त हुआ है। यह राशि हिसाब में शामिल नहीं की गई है। कमेटी का इस पर कहना है कि यह राशि धरना शुरू करने से पहले 29 जनवरी से पूर्व प्राप्त हुई थी।
जांच कमेटी द्वारा हर मुद्दे की गहराई से जांच की गई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट से राष्ट्रीय अध्यक्ष से अवगत करवा दिया गया है। जिस पर शुक्रवार को दोनों पक्षों को रिपोर्ट से अवगत करवा दिया है। इसके बाद कार्यकारिणी का कोई भी सदस्य सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेगा। अगर ऐसा हुआ तो बयानबाजी करने वाले सदस्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोनों पक्ष आपस में मिल बैठकर कार्यकारिणी का गठन करेंगे।
जाट नेता बलवान कोटड़ा व पूर्व जिला अध्यक्ष प्रवीण किच्छाना ने बताया कि जाट समाज के धरने पर खर्च हुई राशि समाज के अनुसार खर्च हुई। अब समिति ने भी इसमें क्लीन चिट दे दी है। इस मौके पर बलवान कोटड़ा, प्रवीन किच्छाना, राजेश देवबन, सोनू सौंगल, सुंदर लाल, बल्लू, होशियार गिल सहित मौजूद रहें।
पाई-पाई का हिसाब होने तक जारी रहेगा आंदोलन
कैथल। आरोप लगा रहे गुट की ओर से भरत सिंह बैनीवाल ने कहा कि जब तक राष्ट्रीय कार्यकारिणी चंदे की पाई-पाई का हिसाब-किताब नहीं देती, तब तक समाज चुप नहीं बैठेगा। हनुमान वाटिका में हुई अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। साथ ही निर्णय लिया गया कि 8 मई तक यदि गबन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो 14 मई को महापंचायत बुलाकर गोलमाल का पूरा खुलासा किया जाएगा। राष्ट्रीय समिति की जांच टीम को बाजार में जाकर बिलों की जांच करनी थी। लेकिन एक होटल में मीडिया को बुलाकर कह दिया गया कि हिसाब-किताब में गड़बड़ी नहीं है। जिसका समाज खंडन करता है। धरने में आई राशि में से 30 से 35 लाख रुपये की गड़बड़ी की गई है। जिससे समाज में रोष है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को दबने नहीं दिया जाएगा और पाई-पाई का हिसाब-किताब लेकर वसूल किया जाएगा। इस अवसर पर संजय जागलान, जोगी राम मलिक, पंकज ढुल, बीरबल ढुल, रत्न ढुल, दलबीर ढुल, राजा ढुल, जोगेंद्र कसान, बनी सिंह संधू, बलजीत चंदाना सहित भारी संख्या में लोग मौजूद थे।