सिखों के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर के जीवन को आठवीं और दसवीं के सिलेबस से निकाले जाने को लेकर सिख समुदाय में गहरा रोष है। पिछले साल आई आठवीं की नवीनतम सरकारी पाठ्य पुस्तक उड़ान में गुरु की जीवनी शामिल नहीं है जबकि यह इससे पहले इसी क्लास की किताब में पढ़ाई जा रही थी। इस साल सीबीएसई द्वारा किए गए दसवी कक्षा के पंजाबी पाठ्यक्रम बदलाव में भी गुरु तेग बहादुर जी के जीवन संबंधी पाठ को किताब से बाहर कर दिया गया है।
इस संबंध में पड़ताल की गई तो पता चला कि उक्त किताबों का मसौदा तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2009-10 ही बन चुका था, लेकिन आठवीं की किताबें पिछले सत्र और दसवीं की किताबें इसी सेशन में छपकर आई हैं। शिक्षा के पूरे ढांचे में आमूल चूल परिर्वतन को आतुर भाजपा की सरकार ने भी आखिर पिछली सरकार के कार्यकाल में तैयार की गई किताबों को बांचने की जहमत क्यों नहीं उठाई।
नौंवीं दसवीं में सीबीएसई की किताबें
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छठी सातवीं व आठवीं कक्षाओं में सर्व शिक्षा अभियान के तहत एससीईआरटी गुडग़ांव द्वारा छापी गई पंजाबी की किताबें पढ़ाई जाती हैं जबकि नौंवीं और दसवीं में सीबीएसई द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को ही हरियाणा बोर्ड के सिलेबस में ज्यों की त्यों लागू किया गया है।
चालीस साल से सेम किताबें
दरअसल हरियाणा भर के पंजाबी शिक्षक लंबे अरसे से शिक्षा विभाग से पंजाबी की पुस्तकों में तब्दीली की मांग कर रहे थे। तर्क ये था कि पंजाबी की मौजूदा किताबें पिछले चालीस सालों से पढ़ाई जा रही हैं अब उनमें बदलाव होना चाहिए। हुडा सरकार के कार्यकाल में एससीईआरटी ने इस मामले में पहल करते हुए पंजाबी अध्यापकों की एक समिति बनाकर करनाल में पंजाबी पढ़ा रहे शिक्षक करनैल चंद की अगुवाई में एक समिति का गठन कर दिया और किताब का मसौदा तैयार करवाकर उसे कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग की टीम से पास करवाया था।
सीधी हिदायतों को भी किया दरकिनार
हालांकि पुस्तक निर्माण के समय एससीइआरटी द्वारा यह सीधी हिदायत दी गई थी कि किताब में से किसी भी धार्मिक अथवा राजनीतिक शख्सियत से संबंधित किसी भी पाठ से छेड़छाड़ ना की जाए मगर बावजूद इसके पुस्तक निर्माण समिति में शामिल लोगों ने गुरु तेग बहादुर की जीवनी किताब में से निकाल दी। पुस्तक निर्माण समिति के सदस्य रहे पंजाबी प्रवक्ता हीरा सिंह रतनपाल ने कहा कि जब किताब का मसौदा तैयार किया जा रहा था तो उससे पहले अधिकारियों ने इस बारे में स्पष्ट शब्दों में ताकीद की थी।
पंजाबी शिक्षकों ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
हरियाणा पंजाबी भाषा एवं अध्यापक कल्याण मंच के प्रदेश महासचिव लफटैन सिंह शेरगिल ने आठवीं और दसवीं की पंजाबी विषय की किताबों में से गुरु तेग बहादुर की जीवनी हटाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। शेरगिल ने कहा कि बच्चे अगर पंजाबी में नहीं तो और कौनसी भाषा में सिख गुरुओं का जीवन पढ़ेंगे। शेरगिल ने कहा कि वे इस मसले को राष्ट्रीय सिख संगत के माध्यम से हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा तक पहुंचा चुके है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
जानबूझकर नहीं निकाले पाठ : कंवीनर
विवाद का विषय बनी आठवीं की पंजाबी पाठ्य पुस्तक उड़ान की निर्माण समिति के संयोजक रहे डा. करनैल चंद से जब इस संबंध में पूछा गया तो उनका जवाब था कि गुरु तेग बहादुर की जीवनी आठवीं क्लास की किताब से इसलिए हटाई गई थी क्योंकि दसवीं की पंजाबी पुस्तक साहित्यिक वन्नगीयां में गुरु जी की जीवनी मौजूद थी। डा. चंद ने कहा कि सारा विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि इस साल सीबीएसई द्वारा बदली गई दसवीं की पंजाबी की किताब में भी गुरु तेग बहादुर जी जीवनी शामिल नहीं की गई है। करनैल चंद ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में एससीईआरटी के डायरेक्टर को लिखा है तथा आठवीं की किताब में गुरु जी की जीवनी पुन: शामिल करने की गुजारिश की गई है।
जरूरी है इतिहास
विख्यात सिख आगू दर्शन सिंह उरलाना ने कहा कि बच्चों को इतिहास की जानकारी देना बड़ा जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुरू तेग बहादुर का जीवन त्याग तपस्या और दूसरों के लिए बलिदान हो जाने की प्रेरणा देता है। उनकी जीवनी को पंजाबी की किताब से बाहर निकालना किसी साजिश का हिस्सा हो सकता है। दर्शन सिंह ने पुस्तक निर्माण की पूरी प्रक्रिया की जांच करने की मांग की है।