जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने देवबन कैची चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। समिति ने तितरम मोड़ और देवबन कैंची चौक पर धरने की अनुमति मांगी थी। लेकिन, प्रशासन ने इन दोनों जगहों पर अनुमति नहीं दी। इस पर गांव देवबन में हुई समाज की पंचायत के बाद समिति ने ऐलान कर दिया कि देवबन कैंची चौक पर धरना दिया जाएगा। प्रशासन इस बार बेहद सख्त नजर आ रहा है। पुलिस लाइन में आरएएफ की एक कंपनी भी पहुंच चुकी है। कानून हाथ में लेने की स्थिति में प्रशासन और सरकार ने हिदायत जारी कर दी हैं। शुक्रवार को दिन भर प्रशासन की मीटिंगों का दौर जारी रहा। संघर्ष समिति ने बैठक कर सरकार के साथ बातचीत कर रहे खाप पंचायत प्रतिनिधियों को स्वयंभू बताते हुए समाज विरोधी करार दिया।
दिन भर चली कवायद के बाद शाम को धरनास्थल फाइनल
आरक्षण संघर्ष समिति ने दो जगहों पर अनुमति मांगी थी। प्रशासन ने धरने की अनुमति नहीं दी। इस पर शुक्रवार शाम को समिति सदस्यों ने गांव देवबन के समाज के लोगों के साथ पंचायत की। इसमें फैसला लिया गया कि 29 जनवरी से देवबन कैंची चौक पर ही धरना दिया जाएगा। समिति सदस्य संजय जागलान ने बताया कि धरने के लिए समाज के लोगों ने साथ देने का ऐलान किया है।
नुकसान हुआ तो करनी होगी भरपाई
डीसी संजय जून ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार धरने-प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई प्रदर्शनकारियों की संपत्ति से की जाएगी। आंदोलन के दौरान कोई नुकसान होने की स्थिति में इसकी अगुवाई नेताओं की चल और अचल संपत्ति का विस्तृत आंकलन किया जा चुका है। संवेदनशील गांवों की पहचान हो चुकी है। साथ ही अनुमति लेने वाले व्यक्तियों को लिखित में देना होगा कि वे धरना स्थल पर पूर्णत: शांतिपूर्वक प्रदर्शन करेंगे।
डीसी और एडीसी ने किया दौरा
डीसी संजय जून और एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने प्रस्तावित जाट आरक्षण आंदोलन के आह्वान को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों का दौरान किया। इन गांवों में लोगों से कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। किठाना, तितरम, देवबन, किछाना गांव में जाकर ग्रामीण लोगों से संपर्क करा औरै शांति बनाए रखने में सहयोग मांगा।
पेट्रोल और डीजल की खुली बिक्री पर रोक
जिलाधीश संजय जून ने जिले की सीमा में पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल और डीजल की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है। केवल वाहनों में डीजल या पेट्रोल डाला जाएगा। यह आदेश जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रस्तावित धरने प्रदर्शन के आह्वान के दौरान लागू रहेंगे।
प्रशासन ने ये जारी किए आदेश
1. धरने की अनुमति लेने वालों को देना होगा लिखित में नुकसान हुआ तो उनकी संपत्ति से भरपाई की जाए।
2. धरना प्रदर्शन, आंदोलन का आह्वान करने वाले नेता चाहे वो मौके पर मौजूद न हों, तो भी उन्हें दोषी माना जाएगा।
3. मौके पर भीड़ में मौजूद सभी व्यक्,ि चाहे वे आंदोलन से न जुड़े हों तो उन्हें भी दोषी माना जाएगा।
4. भीड़ और दंगाइयों द्वारा प्रयोग किए गए वाहन का मालिक और चालक भी दोषी माने जाएंगे। चाहे वे मौके पर मौजूद न हों। मौके पर मौजूद तमाशबीन यदि उस स्थान से चेतावनी के बावजूद दूर नही जाते तो वे भी दोषी माने जाएंगे।
5. कानून का उल्लंघन करने की स्थिति में धरना और प्रदर्शन में साउंड सिस्टम लगाने वाले, वाहन उपयोग करने वाले और ऐसे स्थान पर लंगर की व्यवस्था करने वाले लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
6. धरना और प्रदर्शन में भड़काऊ भाषण देने वाले लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
7. सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का उपयोग करने वाले और इसे आगे भेजने वाले लोगों के भी कार्रवाई की जाएगी।
8. राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नजदीक किसी भी प्रकार के धरने या प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।
आज किया जाएगा फ्लैग मार्च
कैथल। डीसी संजय जून और एसपी ने जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने आगामी 29 जनवरी से प्रस्तावित आंदोलन के आह्वान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। जिला प्रशासन ने लोगों में विश्वास बनाए रखने के लिए 28 जनवरी को सुबह 11 बजे कैथल, कलायत, पूंडरी, राजौंद और अन्य कस्बों के साथ ही बड़े गांवों में फ्लैग मार्च का निर्देश दिया है। डीसी ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने कर्तव्यों में कोताही न बरतें।
सात युवक जेल में, अन्य रिहा
जिले में इस समय महज सात युवक जेल में हैं। वे भी जमानत बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे। अन्य 14 रिहा हो चुके हैं। डीसी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने आरक्षण की मांग को पूरा किया है। अब यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। कुल 21 में से 14 को जमानत मिल चुकी है। इस समय केवल सात व्यक्ति इस समय जेलों में बंद हैं। उन्होंने जमानत बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ये व्यक्ति दस्तावेजों की कमी के कारण रिहा नहीं हो पाए हैं। इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। सरकार की तरफ से कुछ कमी नहीं रही है। ऐसे आंदोलन के दौरान यदि कोई युवा हिंसक गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसका भविष्य खराब हो जाएगा।
समय पर कदम उठाएं अधिकारी
एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने कहा कि घटना स्थल की समीक्षा के बाद संबंधित ड्यूटी मेजिस्ट्रेट समय पर आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई करें। यदि कार्रवाई करने में देरी होती है तो इससे स्थिति बिगड़ सकती है। कार्रवाई की वीडियोग्राफी अवश्य करवाएं। संबंधित अधिकारी गांवों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी धरने में हिस्सा लेने से होने वाली कार्रवाइयों के बारे में जागरूक करें। डीसी संजय जून ने कहा कि जाट समाज द्वारा जिन दो जगहों पर धरने की अनुमति मांगी गई है। वहां पंचायत के ऐतराज के कारण अभी तक अनुमति नहीं दी जा सकी है। प्रशासन समिति द्वारा नई जगह पर अनुमति के लिए आवेदन के इंतजार में है। इसके बाद ही अनुमति दी जाएगी।