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बरसात में भीगते है जिलेभर के 2500 विद्यार्थी नहीं आया प्रशासन को तरस

Sat, 28 Jan 2017 12:19 AM IST
kaithal beuro
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x - फोटो : amar ujala
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गणतंत्र दिवस समारोह इस बार बरसात और प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। बरसात के पूर्वानुमान के बावजूद प्रशासन की ओर से जिलास्तरीय कार्यक्रम के लिए कोई वेकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। जिस कारण करीब ढाई हजार बच्चे, स्कूल स्टॉफ बरसात में भीगते रहे। हांलाकि कलायत एसडीएम ने बरसात के चलते अनाज मंडी में शेड के नीचे कार्यक्रम का आयोजन करवाया। यहां पुलिस लाइन में कार्यक्रम में पहुंचने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों व स्कूल स्टॉफ सदस्यों को पुलिस की बेरुखी का सामना करना पड़ा। उन्हें कीचड़ भरे रास्ते से वहां पहुंचने के लिए कहा गया है। पूरे समारोह में केवल मुख्य अतिथि का वाटरप्रूफ टेंट था। इसके अलावा विद्यार्थियों को बरसात के बचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं था।
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बरसात को देखते हुए नहीं की वैकल्पिक व्यवस्था
समारोह के लिए पुलिस लाइन मैदान को चुना गया था। यहां वैसे ही भीड़ कार्यक्रम देखने के लिए कम ही पहुंचती है। बरसात के चलते इस मैदान में रात भर से पानी भरा हुआ था। सुबह बच्चे पहुंचे तो उन्हें पक्के रास्ते से इंटरी तक नहीं दी गई। तय समय पर मुख्य विधानसभा स्पीकर आए और ध्वजारोहण कर चले गए। प्रशासन मुस्तैद होता तो आरकेएसडी कॉलेज का इंडोर स्टेडियम व अनाज मंडी में समारोह हो सकता था।

मासूमों को दो घंटे करना पड़ा बरसात में इंतजार
पिछले करीब 15 दिनों से गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी में जुटे करीब जिले के 2500 विद्यार्थी जिला प्रशासन के आदेशों पर सुबह करीब आठ बजे समारोह स्थल पर बरसात के बीच पहुंच गए। बरसात बंद नहीं हुई। इसके बाद करीब 10 बजे मुख्य अतिथि के ध्वजारोहण के बाद विद्यार्थियों को बिना प्रस्तुति के बरसात के कारण जाने के आदेश जारी किए गए।
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समारोह में भाग लेने वाली छात्रा तमन्ना, प्रीति, पारूला, मनीषा, तमन्नव, रोहित, शंकर ने बताया कि ऐसी व्यवस्था उन्होंने पहली बार देखी है कि कीचड़ से ही समारोह स्थल तक पहुंचना है ओर वहीं से आना है। जब रास्ता पक्का बना हुआ है तो वहां से मुख्य अतिथि के बाद निकाल तो सकते है। इस अवसर पर कई छात्राएं कीचड़ से निकलते हुए रो पड़ी।

मीडिया कर्मियों तक के वाहन रोक दिए गए...
समारोह स्थल तक पहुंचने के लिए एक रास्ता ही केवल पुलिस लाइन का पक्का है। उस रास्ते से मुख्य अतिथि व प्रशासन के अधिकारी ही अंदर जा सके। मीडिया कर्मियों तक को वहां से नहीं जाने दिया गया। जिस पर लोगों ने विरोध जताया जब प्रशासन उन्हें अंदर तक नहीं जाने देता तो राष्ट्रीय पर्व के लिए निमंत्रण ही क्यों दिया जाता है?
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