कसान। खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के लिए गांव कैलरम को रेड जोन में शामिल किया गया है। पिछले वर्ष गांव में खेतों में फसल अवशेष जलाने के साथ आग लगने की कई घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों में प्रशासन की ओर से किसानों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इसको देखते हुए इस बार गांव को रेड जोन की श्रेणी में रखा गया है। सरपंच सीता देवी के अनुसार गांव को रेड जोन में शामिल किए जाने के बाद पंचायत ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने की तैयारी शुरू कर दी है। पंचायत जल्द ही 10 सदस्यीय कमेटी का गठन करेगी। कमेटी गांव के किसानों से संपर्क कर उन्हें फसल अवशेष नहीं जलाने के लिए जागरूक करेगी। फसल तैयार होने के बाद गांव में मुनादी करवाकर भी किसानों को पराली प्रबंधन और आग लगाने की घटनाओं को रोकने का संदेश दिया जाएगा। पंचायत का प्रयास रहेगा कि इस सीजन में गांव में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
ग्राम पंचायत की सरपंच सीता देवी ने बताया कि पंचायत को गांव के रेड जोन में शामिल किए जाने की जानकारी वीरवार को मिली। उन्होंने बताया कि पिछले साल गांव में कई स्थानों पर आगजनी हुई थी। हालांकि इनमें कुछ घटनाओं का कारण शॉर्ट सर्किट भी रहा था। पंचायत की ओर से इस बार आगजनी और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। पहले की तुलना में गांव में आगजनी की घटनाओं में कमी आई है। वे स्वयं भी किसान हैं और फसल अवशेष जलाने के बजाय कल्टीवेटर की मदद से उसे खेत की मिट्टी में मिलाते हैं। इससे अवशेष आगामी फसल के लिए खाद का काम करते हैं।
हाईवे किनारे सूखे चारे की मंडी से भी बना रहता है आग का खतरा
सरपंच के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में गांव कैलरम के पास हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर सूखे चारे की बड़ी मंडी विकसित हुई है। यहां किसान पराली और तूड़ी बेचने के लिए पहुंचते हैं। व्यापारी इसे आसपास के जिलों के साथ दूसरे राज्यों में भी भेजते हैं। बड़ी मात्रा में सूखा चारा एकत्र होने के कारण यहां आगजनी का खतरा बना रहता है। पिछले वर्ष भी शॉर्ट सर्किट के कारण यहां आगजनी की घटनाएं हुई थी। इस कारण यहां कई दिन तक लगातार लोकेशन आगजनी की विभाग को मिल रही थी।
गांव कैलरम दृश्य