रविवार को आरकेएम पैलेस में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा एक सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे। राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों ने लोगों को सरकार द्वारा समिति के आरक्षण व अन्य मांगों पर हुए समझौते पर अमल की जानकारी दी गई। आरकेएम पैलेस में भारी संख्या में उमड़ी लोगों की भीड़ सहित राष्ट्रीय समिति ने चंदे के मामले में कैथल के समिति पदाधिकारियों को क्लीन चिट दी और आरोप लगा रहे लोगों को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किसी बड़े नेता के इशारे पर काम करने की बात कही।
सम्मेलन में यशपाल मलिक ने कहा कि आंदोलन के बाद प्रदेश के सभी जिलों में जाकर जाट समाज के लोगों सरकार के साथ हुए समझौतों को पूरा करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। लंबे समय से लड़ी जा रही लड़ाई में अब जाट समाज का पैर क्लच पर है। यदि सरकार आरक्षण के मामले पर किए गए समझौतों पर कोई भी ढील करेगी, तो समाज दिल्ली कूच करने में देरी नहीं करेगा। मलिक ने सांसद सैनी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सांसद को सांसद बनने से पहले कभी भी जाटों की खिलाफत याद नहीं आई। अब बीजेपी के सांसद बने तो गैर जाट की राजनीति करके सीएम बनने के सपने देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति केवल एक सामाजिक संगठन है जो समाज के लोगों के हकों के लिए लड़ेगा। समाज को एकता और अखंडता की जरुरत है न कि राजनीतिक लोकप्रियता की। 14 मई से हो रहे सम्मेलनों के बाद 4 जून को रोहतक में प्रदेश स्तरीय बैठक में आगामी निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर रामकरण हलाल जींद, प्रताप दहिया, सुरेश मच्छरौली, सुबे सिह कुराड़, सुरेंद्र मलिक पानीपत, मियां सिंह सरपंच जाजनपुर, पानीपत जिलाध्यक्ष मामन सिंह, दलबीर चहल एडवोकेट, सतबीर देशवाल पानीपत, जिला कुरुक्षेत्र से बलदेव राठी, कैप्टन बलजीत भाणा, ओमप्रकाश जुलानी खेड़ा, दिल्ली प्रदेशसे दयानंद देशवाल, जाट शिक्षण संस्थान के प्रधान रणबीर फौजी, मास्टर अजमेर हरसौला, सोनू सौंगल आदि मौजूद रहे।
20 एकड़ में बनाया जाएगा कोचिंग सेंटर
मलिक ने कहा कि जाट समाज के बच्चों के उत्थान के लिए प्रदेश में 20 एकड़ की जमीन पर एक कोचिंग सेंटर बनाया जाएगा। जिसमें समाज के बच्चों को निशुल्क कोचिंग दी जाएगी। इस कोंचिग सेंटर में आईएएस लेवल, बैंकिंग, एसएससी, मेडिकल व इंजीनियरिंग से जुड़े क्षेत्रों में मुकाम पाने के उद्देश्य से बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाई जाएगी।
चंदे के विवाद पर राष्ट्रीय समिति सहित समाज के लोगों ने दी क्लीन चिट
आरकेएम पैलेस में आयोजित सम्मेलन में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के चंदे का मामला भी छाया रहा। राष्ट्रीय समिति सहित समाज के लोगों ने हाथ उठाकर पदाधिकारियों को क्लीन चिट दी। वहीं चंदे में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे लोगों को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत काम करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा राजनैतिक लोगों के नक्शेकदम पर चलकर समिति पर आरोप लगाने का कार्य किया जा रहा है। चंदे पर आरोप लगा रहे लोगों को ऐसे आरोप लगाने चाहिए जिस पर चर्चा की जा सके। घर के मसले को घर में निपटाना चाहिए। न की समाज को तोड़ने का काम करें। मलिक ने कहा कि आरोप लगा रहे लोगों को हिसाब को लेकर संतुष्ट किया जा चुका है। उन्हाेंने तीन प्वाइंट पर हिसाब मांगा था। जिस पर उन्हें तीन सदस्यों की कमेटी बनाकर प्रत्येक खर्चे का ऑडिट करवाकर हिसाब दे दिया गया है। जिसमें वह संतुष्ट भी हुए लेकिन बाद में एक राजनेता के इशारे पर चंदे में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। वह संगठन में शामिल नहीं हो सकता है। समाज उसे संगठन में शामिल होने की अनुमति नहीं देगा।
सम्मेलन के दौरान समिति के प्रदेश प्रभारी अशोक बल्हारा ने कहा कि समझौतों के मुताबिक सरकार ने 30 समाज के 30 लोगों को नौकरी देने की प्रक्रिया को शुरू की है। चंदे के मामले में कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे है वे समिति के पदाधिकारियों को बदनाम कर रहे हैं।
समिति के जिलाध्यक्ष प्रवीन किच्छाना ने कहा कि धरने के बाद जो राजनीतिक बंवडर जिले में आया। यह बंवडर एक राजनीतिक प्रकरण के तहत चलाया गया। केवल संगठन को तोड़ने का प्रयास हो रहा है। समाज का कोई भी व्यक्ति कभी हिसाब ले सकता है। अगर उनके हिसाब-किताब में गड़बड़ी होती है। समाज उनके गले में जूते डालकर घुमाए।
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलवान कोटड़ा ने कहा कि जाट समाज हमेशा के एकता के लिए जाना गया है। जाट समाज पर जब भी कोई मुसीबत आई तो सभी लोग संगठित होकर चले और हर लड़ाई में जीत हासिल की। यशपाल मलिक समाज की लड़ाई लड़ रहे हैं। आरकेएम पैलेस में भारी संख्या में समाज के लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी।
सामाजिक और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे : बैनीवाल
आरकेएम पैलेस में पहुंचे समाज व समिति द्वारा दी गई क्लीन चिट पर हिसाब मांग रहे भरत सिंह बैनीवाल ने कहा कि उन लोगों को किसी पद की जरूरत नहीं है। अब तक चंदे के लिए जो जवाब दिया गया है। वे उससे संतुष्ट नहीं हैं। जितना भी गुप्तदान आया, उसका कहीं कोई जिक्र नहीं हैं। उनके पास ऐसे कर्मचारियों व अधिकारियों की जानकारी आ रही है। जिन्होंने चंदा दिया, वे केवल इसलिए खुलासा नहीं कर सकते क्योंकि इन लोगों का नुकसान हो जाएगा। जब तक हिसाब-किताब नहीं दिया जाता, उनकी आवाज बुलंद रहेगी। वे अब कानूनी व सामाजिक लड़ाई लड़ेंगे। जहां भी धरना दिया जाएगा, वहां जाकर अपनी बात रखेंगे। गड़बड़ तीस लाख से भी ज्यादा है।