संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि हमारे हिंदू समाज में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना महत्वपूर्ण माना गया है।शास्त्रों में कहा गया है कि श्रद्धा पूर्वक पितरों के उद्देश्य से जो कर्म किया जाता है। वह श्राद्ध कहलाता है । इसका मूल आशय यह है कि श्राद्ध कर्म में सर्व प्रमुख श्रद्धा ही होती है। पितरों के लिए अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में श्राद्ध अवश्य करें। यह प्राचीन काल से चली आ रही हमारी महान परंपरा है। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम श्वेत वस्त्र धारण कर अपने पितरों का मानसिक स्मरण करें और पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं और अपने हाथ में संकल्प के लिए त्रिकुश तिल एवं जल लेकर संकल्प का उच्चारण करें।
इसके बाद संकल्प के जल को भूमि पर छोड़ देना चाहिए, तत्पश्चात ब्राह्मण भोजन करवाने से पूर्व पंचबली (गोबली, श्वानबली, काक बली, देवादि बली, पिपीलिका बली करनी चाहिए। पंचबली के नियमित निकाला गया भोजन पूर्वक कर्म से सभी को खिला देना चाहिए।पंचबली कर्म करने के पश्चात ब्राह्मण भोज करवाना चाहिए एवं दान देकर उन्हें संतुष्ट करें। इसके पश्चात स्वयं भोजन करें। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि श्राद्धकर्ता यदि अत्यंत निर्धन और कुछ भी करने की स्थिति में नहीं हो तो पितरों के नाम से गाय को चारा खिलाना ही पर्याप्त होगा। यदि वह इतनी व्यवस्था भी नहीं कर सकता तो दोनों हाथ से प्रार्थना करें की हे पित्रगण मेरे पास श्रद्धा के उपयुक्त कुछ भी नहीं है न धन है ना धान्य। मेरे पास सिर्फ आपके लिए श्रद्धा एवं भक्ति ही है। आप कृपया इन्हें ग्रहण करें और मुझ पर अपनी कृपा करें।ऐसे करने मात्र से ही पित्रगण प्रसन्न हो जाते हैं।
श्राद्ध पक्ष विशेष 2025 .
तारीख - दिन - तिथि .
( 1 ) 7 सितंबर 2025 - रविवार - पूर्णिमा श्रद्धा / श्री सत्यनारायण व्रत एवं चंद्र ग्रहण।
( 2 ) 8 सितंबर 2025 - सोमवार - प्रतिपदा श्राद्ध।
( 3 ) 9 सितंबर 2025 - मंगलवार - द्वितीय श्राद्ध।
( 4 ) 10 सितंबर 2025 - बुधवार - तृतीय श्राद्ध एवं गणेश चतुर्थी व्रत।
( 5 ) 11 सितंबर 2025 - गुरुवार - चतुर्थी श्राद्ध।
( 6 ) 12 सितंबर 2025 - शुक्रवार - पंचमी श्राद्ध ( सुबह 10 बजे) और 10 बजे के बाद षष्ठी श्राद्ध।
( 7 ) 13 सितंबर 2025 - शनिवार - सप्तमी श्राद्ध।
( 8 ) 14 सितंबर 2025 - रविवार - श्री महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ एवं अष्टमी श्राद्ध।
( 9 ) 15 सितंबर 2025 - सोमवार - सौभाग्यवती माता का श्राद्ध एवं नवमी का श्राद्ध।
( 10 ) 16 सितंबर 2025 - मंगलवार - दसमीं का श्राद्ध।
( 11 ) 17 सितंबर 2025 - बुधवार - एकादशी व्रत एवं श्राद्ध।
( 12 ) 18 सितंबर 2 0 25 - गुरुवार - द्वादशी श्राद्ध।
( 13 ) 19 सितंबर 2025 - शुक्रवार - प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि व्रत एवं त्रयोदशी श्राद्ध .
( 14 ) 20 सितंबर 2025 - शनिवार - अकाल मृत्यु श्राद्ध एवं चतुर्दशी श्राद्ध .
( 15 ) 21 सितंबर 2025 - रविवार - अमावस्या का श्राद्ध एवं सुर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इस का कोई सूतक पातक नहीं होगा अतः देश के सभी मंदिर खुले रहेंगे ।