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...तो कोई खेत नहीं रहेगा प्यासा

Sun, 20 Mar 2016 12:34 AM IST
नसीब सैनी कैथल।
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लगातार गिर रहे भू-जलस्तर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना पर अमल करते हुए जिले में अगले 5 साल के लिए वाटर बजट तैयार किया जा रहा है। जिसमें हर खेत को पानी एवं पर ड्रॉप मोर क्रॉप (हर बूंद से ज्यादा पैदावार) के लक्ष्य के तहत भविष्य की जरूरतों के अनुसार पानी की बचत एवं उसके सद्उपयोग की योजना तैयार की जा रही है। 31 मार्च तक यह काम पूरा होना है। राज्य स्तर पर रिपोर्ट भेजने उपरांत सीधा पीएम कार्यालय से योजना को मंजूरी मिलेगी।

तेजी से गिर रहा है जिले में भू-जलस्तर
किसानों सहित पीने के लिए अधिकतर इलाके में भू-जल का ही प्रयोग हो रहा है। लेकिन इसमें लगातार आ रही गिरावट के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। औसतन हर साल 1 मीटर की गति से जलस्तर नीचे जा रहा है। इस समय औसतन 80 फुट गहराई पर अच्छा पानी मिलता है। वहीं कई इलाकों में तो यह इससे भी गहराई पर है। जिसका मुख्य कारण सभी कार्यों के लिए भू-जल पर ज्यादा निर्भरता है। लेकिन यदि सरकार की यह योजना सफल होती है तो पानी की काफी हद तक बचत की जा सकेगी।
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पानी को लेकर जुटाई जा रही है हर तरह की जानकारी
नई योजना के तहत जिले में पानी को लेकर हर तरह की जानकारी जुटाई जा रही है। जिसमें बरसात, नहरी, भू-जल व तालाबों मे ंकितना पानी उपलब्ध होता है और उद्योग, घरेलू प्रयोग, पशुओं, सिंचाई सहित वन विभाग को कितने पानी की जरुरत रहती है। उपलब्धता एवं खर्च के बीच के अंतर को ध्यान में रखकर यह वाटर बजट बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी होगी, उन क्षेत्रों के लिए खालों को पक्का करने, पाइप के माध्यम से पानी ले जाने, फव्वारा व टपका सिंचाई, पेयजल के लिए आवश्यक प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भेजे जाएंगे। बताया जा रहा है कि इस योजना में पैसे की कोई कमी नहीं है।

14 से अधिक विभागों के अधिकारियों को दी गई ट्रेनिंग
शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में कृषि उप-निदेशक डा. महावीर सिंह ने कृषि, वन, सिंचाई, मत्स्य, जनस्वास्थ्य, मृदा संरक्षण अधिकारी कार्यालय, नगर परिषद सहित पानी से जुड़े 14 से अधिक विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें आवश्यक रिपोर्ट समय पर देने को कहा गया है। ताकि 31 मार्च तक यह रिपोर्ट तैयार हो सके। एडीसी को इस योजना का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

पर ड्रॉप, मोर क्रॉप है मुख्य लक्ष्य
इस योजना का मुख्य लक्ष्य पर ड्रॉप मोर क्रॉप है। जिसके तहत एक बूंद पानी से अधिक फसल की उपज लेने का प्रयास है। इसी के माध्यम से हर खेत को पानी उपलब्ध करवाए जाने की योजना है। साथ ही पानी की बचत कर भविष्य की जरूरतें पूरा करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

जिले में 6 ब्लॉकों में भू-जल स्तर खत्तरनाक स्थिति में
जिले भर में 6 ब्लॉकों में भू-जलस्तर खत्तरनाक स्थिति में है। यहां बरसात के समय में लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। वहीं कई इलाकों में बरसात न होने की स्थिति में पानी के अभाव में फसलें सूख जाती हैं। जिले में भू-जलस्तर की स्थिति को नहीं संभाला गया तो आने वाले समय में यहां पीने तक के पानी की समस्याएं हो जाएंगी। कलायत, राजौंद क्षेत्र में सिंचाई के पानी की काफी समस्या है।

प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत जिले में सिंचाई योजना तैयार की जा रही है। जिसके तहत संबंधित विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। 31 मार्च तक जिला सिंचाई योजना तैयार करके मुख्यालय भेज दी जाएगी।
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डा. महावीर सिंह, जिला कृषि उपनिदेशक, कैथल।

80 फुट नीचे जा चुका है कई इलाकों में पानी
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा के अनुसार जिले में करीब 80 फुट पर ही अच्छा पानी मिलता है। यह लगातार नीचे जा रहा है। कैथल भू-जलस्तर के मामले में डेंजर जोन में आता है।
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