इराक में बिगड़ रहे हालात से गांव सेरहधा निवासी दीपक के परिजन सकते में हैं। परिवार की आर्थिक हालत इतनी खस्ता है कि घर में टेलीविजन भी नहीं है जिस कारण परिजन पड़ोसियों के घर जाकर इराक के घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। छह माह पूर्व गांव सेरहधा से दीपक इराक गया था। अब उसके परिजन दहशत में हैं। दीपक के छोटे भाई पवन ने बताया कि दीपक से फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि भारत आने के लिए हवाई टिकट के लिए 950 डालर की मांग की जा रही है जबकि भारत सरकार कह रही है कि भारतीयों को सरकार अपने खर्चे पर वापस लाएगी। वहां की एक कंपनी उसके भाई से टिकट के लिए 900 डालर मांग रही है, दीपक के पास इतने पैसे नहीं हैं। पवन ने भारत सरकार से सहयोग की गुहार लगाई। वहीं दीपक की मां राजबाला का रो-रोकर बुरा हाल है। पवन ने बताया कि दीपक के पास अपना मोबाइल फोन भी नहीं है। फोन आने के इंतजार में एक-एक पल गुजारना मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को 12 बजे दीपक से बात हुई थी। परिवार उसके सकुशल भारत लौटने की दुआ मांग रहा है।
रुक नहीं रहे मां के आंसू
पूंडरी के गांव फतेहपुर निवासी कमल कुमार भी इराक में फंस गया है। उसकी सुरक्षा को लेकर परिजन बहुत चिंतित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। मां महिंद्रो के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिता कंवरभान का कहना है कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए वे मेहनत-मजदूरी कर कर्ज उतार लेंगे। सरकार उनके बेटे की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें। कमल की छोटी बहन का कहना है कि भारत सरकार को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए। हालांकि शुक्रवार को कमल ने अपने घर फोन करके अपने ठीकठाक होने की सूचना दी है। कमल के माता-पिता ने बताया कि अब तक उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित हेल्पलाइन से संपर्क नहीं किया है। क्योंकि उन्हें इस प्रकार की किसी हेल्पलाइन की जानकारी नहीं है। इराक में चल रहीं आतंकवादी घटनाओं की जानकारी उन्हें टीवी के माध्यम से मिली और तब से वे रोजाना टीवी पर नजरें जमाए रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास बेटे का कोई फोन नंबर नहीं है, वे ही उन्हें फोन करता है और अपनी कुशलता की जानकारी देता है।