कैथल। कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में समय की कीमत जान के बराबर होती है, लेकिन नागरिक अस्पताल में व्यवस्था कुछ अलग ही नजर आ रही है। यहां लैब में जांच के लिए आज खून के नमूने लिए जाते हैं, जबकि उनकी रिपोर्ट अगले दिन दी जाती है। ऐसे में मरीजों को रिपोर्ट दिखाने के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। इससे खासकर गरीब और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह 9 बजे से ही रजिस्ट्रेशन काउंटर, ओपीडी और लैब के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। घंटों इंतजार के बाद जब मरीज डॉक्टर को दिखाता है और जांच लिखी जाती है, तो लैब में सैंपल देने के लिए फिर लंबी लाइन लगानी पड़ती है। नमूना देने के बाद मरीजों को बताया जाता है कि रिपोर्ट अगले दिन मिलेगी। ऐसे में मरीज मायूस होकर अगले दिन फिर आने को मजबूर हो जाते हैं।
यह समस्या स्थानीय लोगों के साथ-साथ गांव और दूरदराज के मरीजों के लिए और भी ज्यादा कठिन है। रिपोर्ट लेने के लिए उन्हें दोबारा किराया खर्च करना पड़ता है और दिहाड़ी भी छूट जाती है। कई बार रिपोर्ट दिखाने के लिए डॉक्टर को ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि अगले दिन डॉक्टर की ड्यूटी किसी अन्य वार्ड में होती है या वे अवकाश पर होते हैं। इधर व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब निजी लैब कुछ घंटों में ही रिपोर्ट दे देती हैं, तो नागरिक अस्पताल में इतना समय क्यों लग रहा है। क्या यह मशीनों की कमी है, स्टाफ की सुस्ती है या फिर प्रबंधन की लापरवाही?
ये बोले मरीज
नानकपुर कॉलोनी निवासी मक्खन लाल ने बताया कि वह अपने परिजन की रिपोर्ट लेने आए थे, लेकिन उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा गया। उनका कहना है कि अक्सर रिपोर्ट मिलने में देरी हो जाती है।
थाना गांव निवासी नरेंद्र ने बताया कि दवाई काउंटर पर भी लंबी कतार होने के कारण उन्हें करीब आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। उपचार के लिए अस्पताल में काफी समय लग जाता है।
मरीजों को कम समय में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना ही उनका उद्देश्य है। लैब से जांच रिपोर्ट तय समय में उपलब्ध कराई जाती है। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा।
-डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन