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Kaithal News: पटवारियों की हड़ताल से इंतकाल और जमाबंदी ठप

Wed, 04 Feb 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। दी पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के बैनर तले चल रही पटवारियों व कानूनगो की हड़ताल का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। लघु सचिवालय में नाराज पटवारियों ने मांगों में समर्थन में नारेबाजी कर विरोध जताया। हड़ताल के कारण इंतकाल, फर्द और अन्य राजस्व संबंधी कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। तहसीलों मे 200 प्रमाणपत्र और 300 इंतकाल का का लटक गया।

पटवारियों के काम न करने के कारण नामांतरण (इंतकाल), जमाबंदी, डोमिसाइल रिपोर्ट, नक्शा-निशानदेही, विभिन्न प्रमाणपत्रों का निर्माण जैसे कार्य रुके हुए हैं, जिससे तहसील कार्यालयों में आने वाले आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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लोग दूर-दराज के गांवों से रोजाना पटवार भवन पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां ताले लटके होने के कारण उन्हें निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सभी पटवारी धरना स्थल पर बैठे हुए हैं, जिससे सरकारी राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं और लोग परेशान हो रहे हैं।

नाराज पटवारियों का कहना है कि हाल ही में सरकार ने राज्य के छह पटवारियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें जींद, कुरुक्षेत्र, दादरी सहित अन्य जिलों के पटवारी शामिल हैं। इन पर आरोप है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल गिरदावरी और क्षतिपूर्ति के दौरान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर एक ही फोटो को अलग-अलग खसरा नंबरों पर अपलोड किया गया।

प्रशासन ने इसे अनियमितता मानते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से इन पटवारियों को निलंबित कर दिया। पटवारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मुख्य मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना सुबह से शाम तक चला, जिसका सीधा असर सरकारी राजस्व कार्यों पर पड़ा है।

दो दिन की हड़ताल के कारण जिलेभर में 300 से ज्यादा इंतकाल लटक गए हैं। वहीं 200 से ज्यादा रिहायशी, आय, जाति सहित अन्य प्रमाण व तस्दीक दस्तावेज लंबित हैं। काम न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को भी लोग अपने काम के लिए कार्यालय पहुंचे, लेकिन यहां निराशा मिली। अधिकांश स्थानों पर उन्हें हड़ताल के साथ काम न करने का पर्चा चस्पा मिला।

पटवारी संघ का तर्क ः पटवारी संघ का कहना है कि बाढ़ जैसे कठिन हालात में फील्ड वर्क करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। कई एकड़ भूमि पर अलग-अलग स्थानों से फोटो लेना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था। संघ ने आरोप लगाया कि केवल छह पटवारियों को निलंबित करना अन्याय है, जबकि इसी तरह का कार्य अन्य कर्मचारियों द्वारा भी किया गया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये कार्य हो रहे प्रभावित
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नामांतरण (इंतकाल) और जमाबंदी रिपोर्ट नहीं बन पा रही हैं, जिससे भूमि और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तथा बैंक लेन-देन प्रभावित हैं।

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तहसील कार्यालयों में पहुंचे किसान, किसान क्रेडिट कार्ड धारक और आम नागरिक बिना काम करवाए लौट रहे हैं।

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बार-बार तहसील के चक्कर लगाने से लोगों को आर्थिक नुकसान और समय की बर्बादी झेलनी पड़ रही है।

जनता की गुहार
ॉमानस गांव से आए रघबीर नांगी ने बताया कि उन्हें एक जरूरी दस्तावेज पर पटवारी के हस्ताक्षर करवाने थे। वे तीन दिन से रोजाना दूर से आ रहे हैं, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के कारण पटवार भवन में ताला लगा हुआ है, जिससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

करोड़ा गांव निवासी कृष्ण कुमार ने कहा कि पटवारियों की हड़ताल से सारा कामकाज प्रभावित हो रहा है। वे इंतकाल से संबंधित कार्य के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। दूर-दराज के गांवों से बार-बार आना संभव नहीं है।
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सरकार हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही है, इसी कारण आंदोलन जारी है। यदि मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। धरने का उद्देश्य आम लोगों को परेशान करना नहीं है। वे जनता की दिक्कत समझते हैं, लेकिन पटवारियों के साथ किया गया अन्याय गलत है। सरकार को चाहिए कि छह निलंबित पटवारियों को बहाल कर अन्य जायज मांगें माने, ताकि धरना समाप्त हो और जनता को राहत मिल सके। -सुरेंद्र खटकड़, प्रधान-पटवारी यूनियन

ये हैं मुख्य मांगें



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निलंबित छह पटवारियों को तुरंत बहाल किया जाए।

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आरोपित पटवारियों के खिलाफ निष्पक्ष न्यायिक जांच और उचित सुनवाई हो।

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पटवारियों के प्रशिक्षण की अवधि डेढ़ वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने की घोषणा को लागू किया जाए तथा प्रशिक्षण परीक्षा और जॉइनिंग शीघ्र जारी की जाए।

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वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य सेवा संबंधी लाभ जल्द जारी किए जाएं।
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