संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में संस्कृत भारती हरियाणा की ओर से संस्कृत भाषा को प्रबोधन कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें प्रदेश भर से संस्कृत भाषा सीखने के लिए 64 युवक व युवतियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. डीपी गुप्ता ने शिरकत की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा का अधिक से अधिक प्रचार करना और क्षेत्र को संस्कृत भाषा का बोल चाल की भाषा में प्रचलन करना रहा। शिविर में मुख्य प्रशिक्षक बलजिंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि संस्कृत भाषा बोला, संस्कृत सुनो, संस्कृत पढ़ो, संस्कृत ही जीवन है।
विद्यार्थियों ने प्रशिक्षक के साथ साथ कई बार संस्कृत भाषा में इस वाक्य को दोहराया। सह प्रशिक्षक सुनील ने कहा कि आधुनिक युग में सभी मनुष्य प्राचीन भाषा संस्कृत को भुलते जा रहे हैं। हम प्रयास कर रहे है कि संस्कृत भाषा हरियाणा के महाविद्यालयों, स्कूलों में सभी पाठ्यक्रम संस्कृत भाषा में ही होना चाहिए। यदि सभी विषय संस्कृत में होंगे तो संस्कृत भाषा दोबारा से भारत देश में लौट सकती है।
उन्होंने कहा कि देश में जितनी भी भाषाएं है सभी की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से ही हुई है। महाभारत में श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को संस्कृत भाषा में ही गीता का उपदेश दिया था। इसलिए संस्कृत भाषा ही सभी भाषाओं की जननी है। इस अवसर पर प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. नवीन शर्मा, मुख्य प्रशिक्षक बलजिंद्र, सह प्रशिक्षक सुनील, व्यवस्था प्रमुख डॉ. विनय गोपाल त्रिपाठी, उतर क्षेत्र नरेंद्र, डॉ. रामनिवास व वर्ग अधिकारी ईश्वर दत्त मौजूद रहे।