संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नगर परिषद की ओर से शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से वार्ड नंबर 27, 28 और 30 में 4-बिन सिस्टम के तहत विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान में सामुदायिक सहभागिता टीम और सफाई मित्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
अभियान के दौरान टीमों ने घर-घर जाकर नागरिकों को कचरे के सही पृथक्करण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आईसी विशेषज्ञ भारती मलिक ने बताया कि गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक और सैनिटरी कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालना बेहद जरूरी है। सफाई मित्रों ने उदाहरण देकर समझाया कि रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा, जैसे सब्जियों के छिलके आदि, गीले कचरे में आता है, जबकि प्लास्टिक, कागज और धातु जैसे पदार्थ सूखे कचरे की श्रेणी में शामिल होते हैं। वहीं, पुराने बल्ब, बैटरी और अन्य हानिकारक सामग्री को अलग रखना आवश्यक है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
अभियान के तहत लोगों को स्वच्छता बनाए रखने, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया। नागरिकों को यह भी बताया गया कि यदि घरों में कचरे का सही तरीके से पृथक्करण किया जाएगा, तो कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बन सकेगी।
4-बिन सिस्टम में कचरे का वर्गीकरण
अपशिष्ट प्रबंधन की यह एक उन्नत प्रणाली है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से नया ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत भारत में अनिवार्य किया गया है।
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हरा बिन : गीला कचरा : इसमें जैविक कचरा डाला जाता है, जैसे- रसोई का कचरा, फल-सब्जियों के छिलके आदि। इससे खाद बनाई जाती है।
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नीला बिन : सूखा कचरा : इसमें रीसाइक्लिंग योग्य सामान डाला जाता है, जैसे- प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, और गत्ता।
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लाल बिन : सेनेटरी कचरा : इसमें इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड, रुई और कंडोम जैसे सेनेटरी अपशिष्ट को सुरक्षित रूप से लपेटकर डाला जाता है।
n काला/पीला बिन : घरेलू खतरनाक कचरा : इसमें पुरानी दवाएं, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की हुई बैटरियां, बल्ब और मरकरी थर्मामीटर आदि आते हैं।