कैथल। जिले में एचआईवी संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। साल 2023 से लेकर नवंबर 2025 तक जिला में 594 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। वहीं साल 2023 से लेकर 2024 तक विभाग की तरफ से करीब 800 एआरटी सेंटर में उपचाराधीन मरीजों को 4 करोड़ 74 लाख 34 हजार 500 रुपए की वित्तिय सहायता दी जा चुकी है।
नियम के मुताबिक जो मरीज एआरटी सेंटर में नियमित तौर पर उपचार लेता है तो उसे सरकार की तरफ से 2,250 रुपये की वित्तिय राशि हर माह के हिसाब से दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग लगातार धरातल पर जाकर स्क्रीनिंग कर रहा है। एचआईवी पॉजिटिव मिलने वालों में अधिकतर संख्या इंजेक्शन से नशा करने वालों की है। विभाग की तरफ से मरीजों को बीमारी से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। विभाग के अनुसार जिले में कैथल, गुहला, कलायत व पूंडरी में भी आईसीटी सेंटर बनाया गया है। पूंडरी, गुहला क्षेत्र में एचआईवी के केस ज्यादा हैं, यहां नशे का प्रभाव ज्यादा है। नशा के आदी लोग इंजेक्शन लगाने के लिए एक सुई का बार-बार प्रयोग करते हैं, जो बीमारी का शिकार बन रहे हैं। लापरवाही के चलते ही एचआईवी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। संक्रमित मरीज से दूसरे व्यक्ति के इसकी चपेट में आना, लगातार नशे के सीरिंज का प्रयोग करने के साथ-साथ माता से शिशु के बीच संक्रमण फैलना है। मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार स्क्रीनिंग करता है। जांच के लिए जिला नागरिक अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी जांच हो रही है। पुष्टि होने के बाद नागरिक अस्पताल में खोले गए एआरटी सेंटर में मरीजों की काउंसलिंग कर दवाई दी जाती है। वहीं विभाग की तरफ से इसको लेकर 1097 हेल्पलाइन नंबर भी बनाया गया है। इस नंबर के माध्यम से अगर किसी भी मरीज को कोई जिज्ञासा होती है तो वह सवाल पूछ सकता है।
जिले में मिले एचआईवी पॉजिटिव केस
और स्क्रीनिंग के आंकड़ा
वर्ष
स्क्रीनिंग की गई
मरीज मिले
2023
38,600
270
2024
40,900
200
2025 (अप्रैल से नवंबर)
24,000
124
इन मरीजों को दी जाती है वित्तीय सहायता
n हरियाणा राज्य के दो वैध निवास प्रमाण-पत्र होने चाहिए।
n हरियाणा के एआरटी सेंटर से नियमित एआरटी उपचार होना चाहिए।
n वार्षिक आय 2 लाख से कम होनी चाहिए।
एचआईवी के लक्षण
n तेजी से वजन कम होना।
n थकान महसूस होना।
n मुंह में छाले पड़ना।
n लगातार बुखार होना।
n रात को ज्यादा पसीना आना।
n त्वचा का रंग बदलना।
मुख्य कारण
n इंजेक्शन से नशा करना
n असुरक्षित यौन संबंध
n संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद बढ़ने से
n संक्रमित मां से उसके होने वाले बच्चे को
एचआईवी एड्स से बचाव के लिए अलग से केंद्र बनाया गया है। यहां पहुंचकर कोई भी व्यक्ति इलाज करवा सकता है। इससे बचाव के लिए विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। वहीं मरीजों को नि:शुल्क दवाई दी जाती है। इस बीमारी के पीड़ित को 2250 रुपये की राशि भी आर्थिक सहायता के रूप में दी जाती है। -डॉ. रेनू चावला, सीएमओ।