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Kaithal News: सात बार निर्दलीय, पार्टी उम्मीदवार को छह मर्तबा जीत

Sun, 08 Sep 2024 04:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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नरेंद्र राणा
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पूंडरी। वर्ष 1966 से पूंडरी विधानसभा की सीट अस्तित्व में आने के बाद से अब तक हुए 13 चुनावों में निर्दलीय ने सात बार बाजी मारी है जबकि छह बार के चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। इसमें कांग्रेस चार बार और एक बार जनता पार्टी व एक बार लोकदल पार्टी ने जीत हासिल की।

गौरतलब है कि पूंडरी की सीट पर अभी तक किसी भी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। कस्बा पूंडरी फिरनी के लिए विश्व प्रसिद्ध होने के साथ साथ निर्दलीय को भी जिताने के लिए प्रसिद्ध है। पूंडरी हलके में लगभग एक लाख 91 हजार 881 वोटर है।
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वर्ष 1996 से पूंडरी हलका रहा निर्दलीय का अभेद किला

वर्ष 1996 से पूंडरी हलका निर्दलीय का गढ़ माना जाता रहा है और यहां एक निर्दलीय की परंपरा सी हो गई है। इसी के चलते कई निर्दलीय इस बार फिर से निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मैदान में है और कांग्रेस और भाजपा से भी कुछ उम्मीदवार भी टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।

हालांकि इस बार लोकसभा चुनावों में भाजपा को पूंडरी हलके में मिली जीत के बाद इस बार पूंडरी हलके में भाजपा का टिकट मांगने वालों की कतार लंबी हो चुकी है। वहीं, प्रदेश में भाजपा शासन की सत्ता विरोधी लहर को लेकर इस बार कांग्रेस में भी टिकट मांगने वालों की कतार लंबी है। दूसरी ओर इनेलो और जजपा खेमे अभी तक खामोश दिखाई दे रहे है। आम आदमी पार्टी का पूंडरी में कोई खास प्रभाव नहीं दिखता लेकिन यह भी सच है कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी ने अच्छे काफी वोट लिए थे, लेकिन तब कांग्रेस के साथ गठबंधन था।

क्या इस बार टूटेगी पूंडरी में निर्दलीय की परंपरा...

राजनीतिक क्षेत्र के जानकार मानते है कि इस बार पूंडरी की सीट पार्टी के खाते में जा सकती है और निर्दलीय की परंपरा टूट सकती है। इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि पिछले छह योजना से लगातार यहां निर्दलीय विधायकों के कारण विकास की गति सुस्त पड़ चुकी है। हालांकि इस बार भाजपा के शासन काल में निर्दलीय विधायक रणधीर सिंह गोलन ने भाजपा में शामिल होकर हलके में विकास कार्य करवाने का काम किया है। लेकिन उसके बावजूद पार्टी के विधायक की कमी समय-समय पर खलती रही है। इसके अलावा हलके में कोई बड़ा उद्योग या बड़ी परियोजना भी लागू नहीं हो पाई है। यहां तक कि पूंडरी को सब-डिवीजन बनवाने का मुद्दा जो कि पिछले कई प्लान से उठता रहा है, वो इस बार भी अधूरा रह गया है।

लगातार छह चुनाव से बन रहे है, निर्दलीय विधायक

1966 में कंवर रामपाल ने कांग्रेस ने चौधरी ईश्वर सिंह को हराया। 1968 में स्व. ईश्वर सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी तारा सिंह को हराकर पूंडरी में निर्दलीय की नींव रखी। 1972 में कांग्रेस टिकट पर ईश्वर सिंह ने हरचरण को हराया।

वर्ष 1977 स्वामी अग्निवेश जनता पार्टी ने कांग्रेस के अनंतराम को हराया। 1982 में कांग्रेस के ईश्वर सिंह ने लोकदल के भाग सिंह को हराया। 1987 में लोकदल के मक्खन सिंह ने कांग्रेस के ईश्वर सिंह को हराया। 1991 में कांग्रेस के ईश्वर सिंह ने मक्खन सिंह को हराया। 1996 में पूर्व मंत्री नरेंद्र शर्मा ने जब कांग्रेस उम्मीदवार स्व.ईश्वर सिंह को हराया तो उसके बाद पूंडरी में फिर किसी पार्टी का विधायक नहीं बन पाया और पूंडरी को निर्दलियों का गढ़ कहा जाने लगा।

वर्ष 2000 में तेजवीर सिंह निर्दलीय ने निर्दलीय नरेंद्र शर्मा को हराया। 2005 में कौशिक ने इनेलों के नरेंद्र शर्मा को हराया, 2009 में सुलतान ने कांग्रेस के दिनेश कौशिक को हराया। इसके बाद 2014 में कौशिक निर्दलीय ने भाजपा के रणधीर गोलन को हराया। वर्ष 2019 में निर्दलीय रणधीर सिंह गोलन ने कांग्रेस के सतबीर भाणा को हराया।
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यह भी जानें

पूंडरी विधानसभा में एक अकेले चौ. ईश्वर सिंह ही ऐसे उम्मीदवार रहे हैं। जो चार बार विधानसभा में पहुंचे हैं। ईश्वर सिंह तीन बार कांग्रेस की टिकट और एक बार निर्दलीय जीते। पूंडरी की सीट पर भाजपा पार्टी एक बार भी जीत नहीं सकी।
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