संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। शीतलहर और पाले के कारण रबी फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। इससे फसलों में काला रतुआ, सफेद रतुआ और लेट ब्लाइट जैसे रोग फैलने का खतरा बना रहता है। यह जानकारी गुहला उप मंडल कृषि अधिकारी डॉ. कंचन शर्मा ने दी।
काला रतुआ का अधिक खतरा गेहूं और जौ जैसी रबी की फसलों को रहता है। वहीं सफेद रतुआ मुख्य रूप से सरसों, तोरिया, तिलहन वर्ग की अन्य फसलों में पाया जाता है। लेट ब्लाइट रोग आलू और टमाटर की फसल के लिए अत्यंत घातक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि शीतलहर के प्रभाव से फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे फसलों को सर्दी और पाले से बचाने के लिए समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाएं।
ऐसे करें फसलों का बचाव ः डॉ. कंचन शर्मा ने बताया कि फसलों में जड़ों के बेहतर विकास के लिए बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के साथ फास्फोरस व पोटेशियम का छिड़काव किया जा सकता है। शीतलहर के दौरान जहां संभव हो, हल्की और बार-बार सतही सिंचाई करें। यदि सुविधा हो तो स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रयोग करें, जिससे संघनन के कारण आसपास के वातावरण में तापमान बढ़ता है।
उन्होंने किसानों को ठंड और पाला प्रतिरोधी फसल किस्मों की खेती अपनाने की भी सलाह दी।
ये उपाय भी अपनाएं ः कृषि अधिकारी ने बताया कि बागवानी और फलों के बागों में अंतर फसल प्रणाली अपनाना लाभकारी रहता है। टमाटर, बैंगन जैसी सब्जियों के साथ सरसों और अरहर जैसी लंबी फसलों की मिश्रित खेती करने से ठंडी हवाओं से सुरक्षा मिलती है।
उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में नर्सरी और छोटे पौधों को प्लास्टिक शीट, पुआल या सरकंडा घास से ढककर विकिरण अवशोषण बढ़ाया जा सकता है, जिससे पौधों को गर्म वातावरण मिलता है। थर्मल इंसुलेशन के लिए जैविक मल्चिंग का प्रयोग करें।