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Kaithal News: दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास को समावेशी शिक्षा जरूरी ः डीपीसी

Sat, 03 Feb 2024 03:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का माहौल देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए समावेशी शिक्षा बहुत जरूरी है। यह बात जिला परियोजना अधिकारी सुरेंद्र कुमार आर्य ने कार्यक्रम के दौरान कही। वह हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद पंचकूला की ओर से जखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या स्कूल में दिव्यांग विद्यार्थियों की समावेशी शिक्षा उन्मुखीकरण कार्यक्रम के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण में बोल रहे थे।

उन्होंने बताया कि स्कूलों में पढ़ रहे सामान्य विद्यार्थियों के मुकाबले शिक्षकों को दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा व जरूर का ध्यान रखना होता है, ताकि उनमें किसी प्रकार की हीन भावना विकसित न हो सके। इसके लिए यह सभी विद्यालय मुखिया को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके तहत 25 विद्यालयों के प्रधानाचार्य 25 मुख्य अध्यापक तथा 30 मुख्य शिक्षकों और छह स्पेशल अध्यापकों को इस प्रशिक्षण में शामिल हैं।
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डीपीसी आर्य ने बताया कि इस प्रशिक्षण में प्राचार्य को दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान उनकी समस्याओं का समाधान वालों को निपटाना विशेष रूप से सरल पाठ्यक्रम तैयार करना सामान्य विद्यार्थियों की तरह व्यवहार रखना इत्यादि के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण ग्रहण करने के बाद प्राचार्य व शिक्षक स्कूल में मास्टर ट्रेनर की तरह शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

जिला सहायक परियोजना संयोजक कुशल कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण दो दिवसीय रहेगा। दिव्यांग छात्रों की शिक्षा के प्रति उत्तरदायित्व दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान दिव्यांग छात्रों की बोर्ड परीक्षा में प्रदान की जाने वाली सुविधाएं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए चलाए गए व्यावसायिक तथा डिग्री कोर्स केंद्र तथा राज्य सरकारों की ओर से दिव्यांग छात्रों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाएं दिव्यांग छात्रों के नामांकन के लिए प्रसत एप से विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण अधिकारी के रूप में प्रोफेसर नीरू ने बताया कि किस प्रकार दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान की जाती है। यदि दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो सके यह अभिभावकों के लिए उनके देखभाल में आसानी हो जाती है तथा ऐसे विद्यार्थी के अध्यापक भी फिर उनको विशेष ध्यान देकर पढ़ते हैं। डॉक्टर हवा सिंह साइकोलॉजिस्ट ने आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2006 के तहत दिव्यांग बच्चों के अधिकारों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

सिविल अस्पताल करनाल से आए हरिओम ने दिव्यांग बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाए जा रहे व्यावसायिक कोर्स डिग्री कोर्सों के बारे में बताया। इस अवसर पर नीलोखेड़ी से प्रोफेसर विवेक, खंड शिक्षा अधिकारी संजय शर्मा, बलबीर कश्यप, सुरेश सिंगला, एपीसी मनोज पवार, बलजीत सिंह, जितेंद्र राठौर व राजेश कुमार मौजूद रहे।
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समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य

समावेशी शिक्षा मुख्य रूप से शिक्षा प्रणाली में सभी बच्चों को उनकी वैयक्तिक भिन्नताओं और अक्षमताओं को नगण्य करके सभी को शामिल करने के लिए संदर्भित करती है। यह कक्षा में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बच्चे की विविधता को महत्व देती है और अधिगम और आगे बढ़ने के लिए सभी समान अवसरों की सुविधा प्रदान करती है। शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए।

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