निशीकांत शर्मा
कलायत। कलायत नगर में स्थापित ग्यारह रुद्री मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन माह में तो सुबह पांच बजे से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है। मंदिर में सफाई व्यवस्था व जलाभिषेक के लिए प्रबंध समिति ने पूरे प्रबंध किए हैं।
मंदिर के पुजारी लोकेश शर्मा व भीरा राम शास्त्री ने बताया की कलायत का ग्यारह रुद्री मंदिर का निर्माण सैंकड़ों वर्ष पहले हुआ था। लोकेश शर्मा ने बताया की मंदिर से पूर्व इस स्थान पर संतों का आश्रम होता था जिसमें बड़ी संख्या में साधू संत ध्यान व उपासना करते थे। पुराने समय में इस स्थान को आसन के नाम से जाना जाता था जिसमें ग्यारह रुद्री शिव लिंग स्थापित थे।
मंदिर परिसर में उस समय के दो संतों की समाधि भी मौजूद है। समय के साथ साथ संत विहीन होने के बाद नगर के लोगों ने इस स्थान पर मंदिर बनाने का निर्णय लिया। पूरे नगर के सहयोग से सैकड़ों वर्ष पूर्व ग्याहर रुद्री मंदिर का निर्माण किया गया। इस समय मंदिर में शिव परिवार के साथ साथ राम दरबार, मां भगवती, राधा कृष्ण, हनुमान व मां काली की मूर्ति स्थापित है। लोकेश शर्मा ने बताया की यह मंदिर न केवल स्थापत्य और आस्था का प्रतीक है बल्कि शिव भक्ति की उस परंपरा को भी जीवंत करता है।
मंदिर में भगवान शिव के 11 रूद्र अवतारों की एक साथ पूजा की जाती है। यहां शिव के रूद्र रूपों कपाली, चिंगत, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, आजपाव, अहीरभुन्य, विम्भूष्ठ और भव की एक साथ पूजा होती है। प्रत्येक रूद्र एक विशेष स्वरूप और शक्ति का प्रतीक है और इनकी पूजा से भक्तों को जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलने का पूरा विश्वास है।
उन्होंने बताया की पूरे सावन मास में मंदिर में शिव पुराण की कथा होती है। सायंकाल के समय में महिलाएं मंदिर परिसर में एकत्रित होकर भोले बाबा के भजनों का गुणगान करती हैं। इस उपलक्ष्य में मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सभी महिला भक्त एक साथ परिसर में भजन पर झूमती हैं। दोनों शिवरात्रियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की ओर से कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। शिवभक्ति में लीन कांवड़िये बारिश और अन्य चुनाैतियों का सामना करते हुए मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। संवाद