फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: हिंदी के विकास में दूरदर्शन का अहम योगदान ः डॉ. मोनिका

Sun, 15 Sep 2024 03:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। डॉ. भीम राव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी दिवस पर व्याख्यान आयोजित किया। जनसंचार विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका जाखड़ ने बताया कि 15 सितंबर को भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत दूरदर्शन के रूप में हुई थी। इसे हिंदी भाषी कार्यक्रमों ने हिंदी को पूरे देश में विशेष पहचान दिलाने का कार्य किया है।

दूरदर्शन पर आने वाले हिंदी कार्यक्रमों ने दक्षिण भारत में भी हिंदी को लोकप्रिय बनाया है। प्रो. विरेंद्र खटकड़ ने बताया कि दूरदर्शन की शुरुआत 15 सितंबर 1959 में दिल्ली में हुई थी, लेकिन दूरदर्शन का दैनिक प्रसारण 1965 में शुरू हुआ। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि शुरू में दूरदर्शन आकाशवाणी का ही अंग था और एक अप्रैल 1975 में दूरदर्शन को अलग पहचान मिली।
विज्ञापन


वर्तमान में दूरदर्शन के पांच राष्ट्रीय चैनल के साथ 11 क्षेत्रीय भाषाओं और 30 से अधिक टेलीविजन चैनलों का प्रसारण किया जाता है। 1980 के दशक से दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों नीम का पेड़, नुक्कड़, तमस, हम लोग, भारत एक खोज, तहरीर, मालगुडी डेज आदि ने हिंदी के साथ दर्शकों को भावनात्मक तौर से जोड़ा।

इस अवसर पर जनसंचार विभाग के डॉ. मेहर सिंह ने कहा कि आज हमें हिंदी और दूरदर्शन दिवस को पर्व की तरह मनाना चाहिए क्योंकि भाषा ही किसी समाज को विश्व धरातल पर पहचान दिलाने का कार्य करती है। डॉ. अमित पाहवा ने विद्यार्थियों से कहा कि हिंदी की शब्दावली को जानना है तो स्वतंत्रता से पहले की हिन्दी फिल्मों को देखना चाहिए। क्योंकि आज की फिल्मों में हिंदी महत्व न देकर हिंगलिश (हिंदी और अंग्रेजी की मिश्रित भाषा) का उपयोग करते है।
विज्ञापन


डॉ. नवीन वर्मा ने कहा कि कंप्यूटर को भी अपने विकास के लिए हिंदी पर आश्रित होना पड़ा। इस अवसर पर जनसंचार के विद्यार्थियों ने भी हिन्दी और दूरदर्शन पर अपने विचार रखे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें