कैथल। इंदिरा गांधी महिला कॉलेज में फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित में एमएससी की कक्षाएं शुरू करने के लिए उच्चत्तर शिक्षा विभाग ने मंजूरी दे दी है। इसी सत्र में कालेज में कक्षाएं शुरू होंगी। इसके अलावा बीए के साथ कंप्यूटर साइंस की कक्षाएं भी इस सत्र से आरंभ हाेंगी। गौरतलब है कि कॉलेज में इन चारों विषयों के आरंभ होने से जिले की छात्राओं को लाभ मिलेगा।
पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता था
कॉलेज प्रबंधक समिति के उप प्रधान राम बहादुर खुरानियां ने बताया कि लोक निर्माण एव उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला के प्रयासों कॉलेज को तीनों विषय में एमएससी की कक्षाएं आरंभ करने को मंजूरी मिल चुकी है। जिले में केमिस्ट्री व फिजिक्स में एमएससी न होने के कारण यहां की छात्राओं को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, करनाल, अंबाला, यमुनानगर जाना पड़ता था। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को निरीक्षण के लिए पत्र भेज दिया गया है। निरीक्षण के बाद इसी सत्र से कॉलेज में तीनों विषय की कक्षाएं आरंभ कर दी जाएंगी।
यह कहना हैं जिले की युवतियों का
कॉलेज में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ में एमएससी शुरू होने से जिले की छात्राओं को काफी लाभ होगा। यह सुविधा न होने से जिले की छात्र -छात्राओं को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, करनाल, अंबाला, यमुनानगर, चंडीगढ़ जाना पड़ता था। युवतियों को खासकर बाहर जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छात्रा चारू वर्मा, सोनम, सुनेहा, अनीषा और पारूल ने बताया कि उन्होंने केमिस्ट्री और फिजिक्स में एमएससी के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आवेदन किया है, जिसके लिए इंटर टेस्ट होगा। अब जिले में एमएससी आरंभ होने से उन्हें काफी लाभ मिलेगा।
अच्छी शिक्षा देना एकमात्र उद्देश्य : प्रबंधक समिति
कॉलेज प्रबंधक समिति के सुरजीत बहादुर खुरानिया, प्रधान जगदीश बहादुर खुरानिया, उप प्रधान रामबहादुर खुरानिया ने बताया कि जिले की छात्राओं को बेहतर शिक्षा देना ही प्रबंधक समिति का एकमात्र उद्देश्य है। कॉलेज में तीन विषयों में एमएससी आंरभ होने से जिले की छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम छूएंगी।
जिले के लिए गौरव का विषय : प्राचार्या
कॉलेज प्राचार्या डा. साधना ठुकराल ने बताया कि जिले में तीन विषयों में एमएससी की कक्षाएं आंरभ होना कॉलेज के लिए गौरव का विषय है। प्रदेश के कुछ ही चुनिंदा कॉलेजों में तीनों विषय में एमएससी की पढ़ाई हो रही है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय ओम प्रभा जैन ने यह पौधा 1970 में महिला कॉलेज के रूप में लगाया। जो आज वट वृक्ष बन गया है।