संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लघु सचिवालय के सभागार में सोमवार की सुबह करीब 10 बजे शुरू हुए समाधान शिविर के दौरान अफसरों और फरियादियों की चहल-पहल जारी थी। फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे थे और संबंधित विभागों के अधिकारी समाधान का आश्वासन दे रहे थे। इसी बीच करीब 11 बजे उपायुक्त अपराजिता शिविर में पहुंची।
डीसी ने कड़े तेवर अपनाते हुए अधिकारियों को दो-टूक चेतावनी दी कि यदि ऐसी कोई समस्या, जिसका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है, दोबारा उनके समक्ष आई तो संबंधित विभाग के अधिकारी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
शिविर की खास बात यह रही कि उपायुक्त अपराजिता ने स्वयं करीब एक घंटे तक फरियादियों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। आमतौर पर समाधान शिविर में प्रतिनिधि अधिकारियों की मौजूदगी रहती है, लेकिन डीसी की सीधी भागीदारी से प्रशासनिक हलकों में हलचल दिखाई दी।
उन्होंने प्रत्येक शिकायत फाइल का गहनता से अवलोकन किया और मौके पर मौजूद विभागाध्यक्षों से सीधे जवाब-तलबी की। इसके साथ ही अधीनस्थों को निर्देश दिए कि जिन समस्याओं का समाधान हो सकता है, उन्हें जल्द
से जल्द निपटाएं।
प्रशासनिक सख्ती : कार्यप्रणाली सुधारने के निर्देश
शिविर में पहुंचे अधिकांश फरियादी समाज कल्याण विभाग और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर परेशान दिखे। लोगों की प्रमुख शिकायतें बुढ़ापा पेंशन के रुकने और बिना स्पष्ट कारण के राशन कार्ड कटने से संबंधित रहीं। उपायुक्त ने परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से जुड़ी त्रुटियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। हालांकि इस समाधान शिविर में फरियादियों की संख्या पूर्व शिविरों की तुलना में कम रही, लेकिन प्रशासनिक सख्ती पूरी तरह हावी रही। डीसी ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं, ताकि आमजन को छोटे-छोटे कार्यों के लिए सचिवालय के चक्कर न काटने पड़ें।
सजूमा गांव निवासी राजो ने बताया कि उनकी उम्र करीब 64 वर्ष है। वोटर कार्ड गुम हो जाने के कारण बुढ़ापा पेंशन नहीं बन पा रही है। बताया कि करीब 10 साल से राशन कार्ड भी कटा हुआ है। समाधान शिविर में समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दुसैण गांव निवासी सतनाम सिंह ने बताया कि वह अपनी पेंशन बनवाने के लिए दो से तीन बार कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अब तक पेंशन शुरू नहीं हुई। पूंडरी कार्यालय से कैथल और कैथल से वापस पूंडरी जाने को कहा जाता है।
भाणा गांव निवासी बलराज ने बताया कि वह पिछले एक महीने से कार्यालयों के चक्कर काट रह हैं लेकिन उसकी समस्या जस की तस बनी हुई है। किसान आईडी में भूमि विवरण भी गलत दर्ज है।