संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि पीओएसएच (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम के तहत जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (इंटरनल कंप्लेंट कमेटी) का गठन अनिवार्य है। जिन संस्थानों में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए यह आईसीसी बनाना जरूरी है।
लघु सचिवालय स्थित सभागार में सोमवार को आयोजित बैठक में डीसी ने अधिकारियों को पीओएसएच एक्ट के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर आईसीसी का गठन करने को कहा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को कार्यस्थल पर परेशानी होती है तो समिति के समक्ष उसकी शिकायत की सुनवाई की जाएगी। इस समिति का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। बैठक में जिला परिषद के सीईओ सुरेश राविश, डीएसपी गुरविंद्र सिंह, सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला, महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी गुरजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष, डीएसओ राजरानी आदि उपस्थित रहे।
नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश
डीसी ने बताया कि इस कानून के तहत प्रत्येक सरकारी और निजी संस्था, विद्यालय, कॉलेज तथा कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति के समक्ष आने वाली शिकायतों की निष्पक्ष जांच, समयबद्ध कार्रवाई और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक खंड और तहसील स्तर पर तथा शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक नगरपालिका वार्ड में पीओएसएच अधिनियम 2013 की धारा 6(2) के अनुसार नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं। नामित नोडल अधिकारी शिकायतों को प्राप्त कर निर्धारित समय के भीतर संबंधित स्थानीय समिति को भेजने के लिए जिम्मेदार होंगे।