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Kaithal News: मैं तो नोबेल खिलौना लूंगा... ः डॉ. तेजिंद्र

Mon, 13 Oct 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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काव्य गोष्ठी का हुआ समापन।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। साहित्य सभा की अक्तूबर मास की काव्य गोष्ठी वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्य सभा के प्रधान प्रोफेसर अमृत लाल मदान की अध्यक्षता में आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक-कक्ष में हुई। इस मौके पर डॉ. तेजिंद्र ने एक अड़ियल बच्चे की जिद को व्यक्त करते हुए सुनाया- “एक अड़ियल बच्चा रूठकर कोने में खड़ा है, मैं तो नोबेल खिलौना लूँगा, इस ज़िद पर अड़ा है।”

पूरे कार्यक्रम में कविताओं में मानवीय संवेदनाओं की झंकार झलकी। साथ ही प्रेम, करुणा, सौहार्द और समरसता के साथ समाज के हर वर्ग की भावनाओं को कवियों ने व्यक्त किया। गोष्ठी के दौरान अश्वनी कुमार के काव्य-संग्रह “सपनों का होना ज़रूरी है” तथा सत्यदेव शर्मा के सूक्ति-संग्रह “वेद ज्ञान सूक्ति-संग्रह” का विमोचन किया गया। इसी क्रम में प्रो. अमृत लाल मदान ने राजेश भारती के नव प्रकाशित काव्य-संग्रह “रेत पर रेखाएं” पर समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।
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काव्य-पाठ के क्रम में दिनेश बंसल ‘दानिश’ ने दोस्ती को ज़िंदगी बताते हुए कहा-“जो ये तेरी दोस्ती है मेरे लिये, बस यही ज़िंदगी है मेरे लिये।” अनिल कौशिक ने बेटी पर भावपूर्ण पंक्तियां सुनाईं—“मतला, मक्ता, ख्याल है बेटी, संगीत की सुर-ताल है बेटी।”

रिसाल जांगड़ा ने प्यार को जीवन का सार बताते हुए कहा- “जीवन है सार साथियों, दुनिया में बस प्यार साथियों।” श्याम सुंदर शर्मा गौड़ ने हरियाणा की महिमा गाते हुए कहा- “मन्नै सोणा लाग्गै, मन्नै प्यारा लाग्गै, म्हारा हरियाणा, म्हारा हरियाणा।”

इसी क्रम में राजेश भारती ने आत्मपरिचय के स्वर में कहा- “हिंदुस्तानी कल्चर हूँ, प्रेम का अक्षर-अक्षर हूँ।” सुरेश कुमार कल्याण ने पूनम की रात का मनोहर दृश्य उकेरते हुए कहा-“धरा चांद गल मिल रहे, करते मन की बात जगमग है कण-कण यहाँ, शुभ पूनम की रात।”

डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने आत्मनिरीक्षण का संदेश देते हुए कहा- “ये मुखौटे उतार कर देखो, अपने भीतर निहार कर देखो।” कविराज रामकुमार भारतीय ने भावपूर्ण शब्दों में कहा- “सुरती बिन भजन, भजन बिन जीवन, जीवन अधूरा संगीत बिना।” मधु गोयल ‘मधुल’ ने बेबस-लाचारों के लिए ईश्वर से दुआ की- “इन बेबस लाचारों को तुम दे दो सहारा, रहे हमेशा हम बच्चों पर आशीर्वाद तुम्हारा।”

इनके अतिरिक्त सिद्धार्थ शाद, सतीश शर्मा माजरा, अनिल गर्ग धनौरी, रामफल गौड़, डॉ. विकास आनन्द, बलवान सिंह कुण्डू ‘सावी’, पूजा रानी, विजय पाल, डॉ. चतरभुज बंसल ‘सौथा’, अश्वनी कुमार, सूरजभान शांडिल्य, महेंद्र पाल सारस्वत, डॉ. प्रीतम लाल शर्मा, डॉ. हरीश चंद्र झंडई, कमलेश शर्मा और प्रो. अमृत लाल मदान ने भी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया।
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कार्यक्रम में गांव अलेवा (जींद) से पधारे कविराज रामकुमार भारतीय मुख्य अतिथि रहे, जबकि मंच संचालन सभा के महासचिव डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने किया। कार्यक्रम का समापन अध्यक्ष प्रो. अमृत लाल मदान की सारगर्भित टिप्पणी और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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