कैथल। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर एलिवेटेड ट्रैक निर्माण कार्य के कारण शुक्रवार को करीब 10 घंटे तक रेल सेवाएं प्रभावित रहीं। कैथल व ढांड से पैसेंजर ट्रेनें वापस जींद लौटीं। सुबह सात से शाम छह बजे तक चले कार्य के कारण लंबी दूरी की कई ट्रेनों के मार्ग बदले गए, कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से चलाया गया, जबकि कुछ ट्रेनें रद्द रहीं। इसका असर कैथल रेलवे स्टेशन पर भी देखने को मिला, जहां रोजाना की तुलना में यात्रियों की संख्या काफी कम रही।
अधिकतर यात्री ऑनलाइन ट्रेन की स्थिति देखने के बाद ही स्टेशन पहुंचे, जबकि कई लोगों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी। कई यात्रियों ने वैकल्पिक साधनों से यात्रा की। रेलवे अधिकारियों के अनुसार कैथल रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब 500 यात्री विभिन्न ट्रेनों से सफर करते हैं। वहीं जिले के विभिन्न स्टेशनों को मिलाकर करीब एक हजार दैनिक यात्री रेल सेवा का उपयोग करते हैं। पबनावा, पिहोवा रोड, टीक, ग्योंग, नया रेलवे हॉल्ट कैथल, पुराना रेलवे स्टेशन, कुतुबपुर, सजूमा और कलायत स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव होता है।
कई ट्रेनों का संचालन बदला, कुछ रहीं रद्द
निर्माण कार्य के कारण 19411 गांधीनगर-दौलतपुर चौक एक्सप्रेस को रोहतक-पानीपत मार्ग से केवल कुरुक्षेत्र तक ही संचालित किया गया। सामान्य दिनों में यह ट्रेन कैथल होकर गुजरती है। वहीं रायपुर हरियाणा-अंब अंदौरा ट्रेन का संचालन भी कैथल मार्ग पर प्रभावित रहा। सुबह सात बजे चलने वाली 54038 जींद-कुरुक्षेत्र पैसेंजर केवल पिहोवा रोड (ढांड) स्टेशन तक ही चली और वहीं से जींद लौट गई। सुबह ढांड तक रेल चलने से कैथल शहर आने वाले यात्रियों को काफी फायदा मिला। इसी तरह सुबह 10 बजे चलने वाली 54040 जींद-कुरुक्षेत्र पैसेंजर केवल कैथल तक संचालित की गई और कैथल से वापस जींद रवाना हो गई।
इसके अलावा 14024 कुरुक्षेत्र-दिल्ली एक्सप्रेस, जो सामान्य रूप से सुबह 6:36 बजे कैथल से रवाना होती है, कैथल के लिए रद्द रही। यह ट्रेन नरवाना से अपने निर्धारित गंतव्य दिल्ली के लिए रवाना हुई।
कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड ट्रैक निर्माण कार्य के कारण रेलवे के निर्देशानुसार सुबह सात से शाम छह बजे तक रेल संचालन में अस्थायी बदलाव किए गए। उन्होंने बताया कि स्थानीय यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पैसेंजर ट्रेनों का सीमित संचालन किया गया।- सतीश कुमार, स्टेशन मास्टर
पुराने रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन। संवाद- फोटो : सांकेतिक