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Kaithal News: विदेशी नस्ल का शौक... बढ़ रहे आवारा कुत्ते

Mon, 30 Dec 2024 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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गुरमीत सीड़ा
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गुहला-चीका। कुछ साल पहले तक लोग सड़क से उठाकर आवारा कुत्तों को घर में लाकर पालते थे। उनकी अच्छी तरह से देखभाल करते थे। अब धीरे-धीरे लोगों ने आवारा कुत्तों से दूरी बना ली और यह शौक दिखावा बन गया। अब लोग विदेशी और अच्छी नस्ल के कुत्तों को पाल रहे हैं। कई घरों में तो ऐसे कुत्ते देखे जा सकते हैं, जिनकी कीमत एक लाख रुपये से भी ज्यादा है।

लोगों का मानना है कि शहर में आवारा घूमने वाले कुत्तों की संख्या बढ़ने का एक बड़ा कारण विदेशी कुत्तों को पालना भी है। अब बेसहारा कुत्तों की संख्या इतनी हो चुकी है कि इन पर अंकुश लगाना आसान नहीं होगा। अब शहर में हर चार-पांच घरों को छोड़ किसी एक के घर में लोगों ने कुत्ता पाला है। सुबह-शाम इन कुत्तों को लेकर घूमना लोगों की दिनचर्या में शामिल हो गया है। पहले बड़ी मुश्किल से एक-दो घरों में ही विदेशी नस्ल के कुत्ते मिलते थे।
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उल्लेखनीय है कि कोरोना काल में तो कुत्ता पालने के लिए लोगों की दिलचस्पी अधिक बढ़ी है। इसकी वजह से हाई ब्रीड नस्ल के कुत्तों की कीमत में दो से तीन गुना बढ़ोत्तरी हो गई है। एक कुत्ते की कीमत पांच हजार से लेकर 20 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा है।

घरों में पाले जा रहे कुत्तों को खाने के लिए जहां चिकन फास्ट फूड खाने को मिल रहा है, वहीं बेसहारा कुत्तों को घरों का बचा हुआ खाना भी ठीक से नसीब नहीं हो रहा। लोग अपने घरों में बचा हुआ भोजन अपने घरों के आगे रख देते हैं। गलियों में घूम रहे कुत्ते आते हैं और इस भोजन को खाकर किसी तरह से अपना पेट भर रहे हैं। कुत्तों की संख्या ज्यादा है और भोजन कम है इसलिए कुत्तों को भरपेट खाने को नहीं मिल रहा। इससे कुत्ते हिंसक हो रहे हैं।

चौधरी महासिंह कॉलोनी निवासी प्रवीण मितल व विशाल गर्ग का कहना है कि शहर में कुत्तों की संख्या पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अब तो गली से आने जाने में भी डर लगता है। उन्होंने कहा कि यदि अब कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले कुछ सालों में कुत्तों की वृद्धि दर को रोकना बहुत मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में नगर पालिका चीका को इसके लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। संवाद
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यह भी जान लें....
हाल के वर्षों में पालतू कुत्तों के हमलों की तमाम घटनाएं सामने आई हैं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने पिटबुल, रॉटविलर, मास्टिफ्स, वोल्फ डॉग, टेरियर जैसे विदेशी नस्ल के कुत्तों के आयात, ब्रीडिंग और बिक्री पर रोक लगाने का सुझाव दिया था। दरअसल, सरकार ने यह सलाह एक समिति की सिफारिशों के आधार पर दी थी। समिति के अनुसार, ये विदेशी नस्ल के कुत्ते खतरनाक हैं और भारत की परिस्थितियों में ज्यादा उग्र हो जाते हैं। सच यही है कि भारत में इन कुत्तों का बाजार बड़ा है। यह भी जान लें कि कई राज्यों में इन खास विदेशी नस्ल के कुत्तों को पालने पर रोक भी लगा दी गई है।
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