सीडी4 मशीन पर सैंपल की जांच करते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : अमर उजाला
कैथल। जिला अस्पताल में सीडी-4 मशीन आने के बाद से एचआईवी मरीजों के लिए जांच और उपचार में आसानी हुई है। जो जांच रिपोर्ट पहले एक सप्ताह में मिलती थी, वह अब एक घंटे में उपलब्ध हो रही है। 15 लाख रुपये की इस मशीन के आने से मरीजों को जांच और उपचार के लिए अब सात दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ रहा।
मशीन नहीं होने के कारण पहले सैंपल रोहतक पीजीआई भेजने पड़ते थे। सैंपल भेजने और जांच में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लग जाता था।
इस दौरान कई बार मरीजों की स्थिति गंभीर होने की आशंका भी बढ़ जाती थी। सीडी 4 मशीन पर जांच के लिए कैथल के अलावा कुरुक्षेत्र, पंचकुला और अंबाला से भी सैंपल आते हैं। कैथल में रोजाना करीब 25 से 30 सैंपल की जांच की जाती है। सामान्य व्यक्ति की तुलना में एचआईवी से संक्रमित मरीजों की यह जांच नियमित अंतराल पर की जाती है और संक्रमण ठीक नहीं होने पर इसको बार-बार भी करवाया जाता है। मशीन नहीं होने के कारण पहले यह संभव नहीं हो पाता था। चिकित्सकों के अनुसार एचआईवी पीड़ितों में अगर सीडी 4 काउंट 350 से नीचे आता है तो उनके शरीर पर एचआईवी की जो दवाएं दी जाती हैं, वह भी असर नहीं करती हैं। इससे कई दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सामान्य व्यक्ति में 500 से 1500 होते हैं सीडी-4 काउंट : जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार सामान्य व्यक्ति में सीडी-4 काउंट 500 से 1500 के बीच होते हैं। ये एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका होती है और इस मशीन के जरिये इन्हीं की मात्रा का पता चलता है। अगर यह स्तर 350 से नीचे है तो फिर जांच रिपोर्ट के आधार पर एचआईवी संक्रमण की दवाओं के साथ ही विशेष एंटीबायोटिक दवाएं भी दी जाती जाती हैं।
सीडी4 मशीन पर सैंपल की जांच करते कर्मचारी। संवाद- फोटो : अमर उजाला
सीडी4 मशीन पर सैंपल की जांच करते कर्मचारी। संवाद- फोटो : अमर उजाला
सीडी4 मशीन पर सैंपल की जांच करते कर्मचारी। संवाद- फोटो : अमर उजाला