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3 हजार वर्ष से भी ज्यादा पुराना है कैथल के श्री अंबकेश्वर मंदिर का इतिहास

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historical place - फोटो : Kaithal
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प्रताप गेट स्थित प्राचीन श्री अंबकेश्वर मंदिर से देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। मंदिर में प्राचीन शिवलिंग का इतिहास महाभारत काल के समय से भी पुराना है। इसका निर्माण करीब 3 हजार वर्ष पहले हुआ था। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में जो मुख्य शिवलिंग है, उसे स्थापित नहीं किया गया था, बल्कि वह हजारों वर्ष पहले जमीन से निकला था। शिवलिंग सीधा पाताल से प्रकट हुआ था। प्राचीन समय में आसपास के श्रद्धालु केवल शिवलिंग की पूजा करते थे, लेकिन मुगलकाल के समय इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया। तब से लेकर अब तक मंदिर में लगातार पूजा पाठ का कार्य किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आकर श्रद्धालु मंदिर में भगवान शिव व काली माता की पूजा करते हैं। शनिवार के दिन मंदिर में भारी संख्या में पहुंचते हैं, जिससे यहां पर मेले जैसा माहौल रहता है।
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शिवलिंग पर प्रहार से बही थी रक्तधारा : मंदिर के महंत देवेंद्र पुरी व प्रेमानंद पुरी ने बताया कि मंदिर में प्रकट हुआ यह शिवलिंग स्वयंभू है, जो खुद पाताल से प्रकट हुआ था। औरंगजेब और अकबर के काल में कुछ लोगों ने मंदिर में स्थापित शिवलिंग को यहां से हटाने का प्रयास किया था। पहले हाथियों को लगाकर इसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। उसके बाद जब कोई चारा नहीं बचा तो वहां पहुंचे लोगों में से एक व्यक्ति ने शिवलिंग पर तेजधार हथियार से प्रहार कर दिया। हथियार का प्रहार होते ही शिवलिंग से रक्तधारा बहने लगी, जिसे देखकर इसे तोड़ने के लिए आए लोग यहां से भाग गए। इसके बाद मंदिर की श्रद्धा और ज्यादा बढ़ गई।
मंदिर में शीशे के टुकड़ों से बनाई गई हैं कलाकृतियां : प्राचीन श्री अंबकेश्वर मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहां शीशे के टुकड़ों को जोड़ कर विशेष प्रकार की कलाकृतियां बनाई गई हैं। देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी शीशे के रंगीन टुकड़ों से बनी हैं। शनिवार के दिन मंदिर में माता काली का पूजन होता है। महंत ने बताया कि नवरात्रों और सावन माह में मंदिर में श्रद्धालुओं की भी लगी रहती है। वर्ष में दोनों बार आने वाले शिविरात्रि पर्व पर शहर के श्रद्धालु मंदिर में कांवड़ लेकर आते हैं। महंत ने बताया कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।
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मंदिर में अपनी पत्नी के साथ पूजा करने के लिए आए श्रद्धालु हुडा सेक्टर 19 निवासी भीमसेन ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों में ऐतिहासिक मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए आ रहे हैं। पहले भी उनके पूर्वज यहां पूजा पाठ करते थे। अब भी यह परंपरा लगातार जारी है। शनिवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाकर माता काली का पूजन करते हैं।
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